अकालियों का अडिय़ल रवैया खड़ी कर सकता है मुश्किल

पुराने फार्मूले की अकाली रट से भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा, भाटिया और ओबराय को टिकट दिया तो भाजपा पृष्ठभूमि के आजाद आ सकते हैं मैदान में

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। नगर निगम चुनाव में भाजपा डामीनेटिड सीटों पर अकाली दल-भाजपा गठबंधन में लोकसभा और विधानसभा का 80:20 फार्मूला लागू करने के भाजपा के दावे पर अकालियों का टका सा जवाब आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा का आलम है। गौरतलब है कि भाजपा द्वारा गठित तालमेल कमेटी की अकाली दल से यहां रविवार को हुई बैठक में भाजपा के उक्त दावे के जवाब में अकाली नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सीट बंटवारे में 65:35 के पुराने फार्मूले पर ही नगर निगम चुनाव लड़ेंगे। वैसे भाजपा ने तालमेल कमेटी के गठन के समय जालन्धर छावनी क्षेत्र को प्रतिनिधित्व न देकर अकाली दल के लिए दुस्साहस के साथ जवाब देने की गुंजायश पहले ही छोड़ दी थी। वैसे जालन्धर में फिलहाल विधानसभा सीट बंटवारे में भाजपा-अकाली दल 75:25 की औसत में है। शहर की चार सीटों में से तीन केंद्रीय, उत्तरी पश्चिम की चार सीटों में से तीन केंद्रीय, उत्तरी पश्चिमी पर भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ती है और एक पर अकाली दल। हालांकि छावनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के मुकाबले अकाली दल का सांगठनिक विस्तार अत्यंत कम है और भाजपा के बूते या कांग्रेस से दल-बदल करवा कर ही अकाली दल चुनाव जीतता आया है। इस वजह से अकाली दल कई बार तो नगर निगम में अपने हिस्से की सीटों पर नए बाहरी चेहरे लाकर चुनाव लडक़ा है। इस स्थिति को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा रहती है और पार्टी का यहां विस्तार होने के बावजूद इसका ढांचा मजबूत नहीं होता। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद गठबंधन की हार की वजह भाजपा कार्यकर्ता अकाली दल के प्रचंध विरोध को मानता है और हाईकमान से निरंतर अकेले चुनाव लडऩे का आग्रह करता आ रहा है। दिसंबर में संभावित नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा कार्यकर्ता अकेले चुनाव लडऩे का प्रयोग शहरी क्षेत्रों से करने की अपनी इच्छा को नेतृत्व से व्यक्त कर चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय नेतृत्व में तालमेल मकेटी में 80:20 फार्मूले की बात रखी थी। लेकिन अकाली दल ने इसे सिरे से नकार दिया है। यदि अकाली दल की इस हेंकड़ी को भाजपा नेतृत्व इस बार भी बर्दाश्त कर गया तो अकाली-भाजपा गठबंधन के लिए नगर निगम चुनाव में मुश्किल बढ़ सकती है। भाजपा कार्यकर्ताओं की निराशा और नाराजगी गठबंधन की राह में बड़ी बाधा बन सकती है। तालमेल कमेटी की बैठक में भाजपा नेतृत्व द्वारा डिप्टी मेयर रहे ओबराय परिवार की अकाली दल में पुन: वापिसी और तत्कालीन नगर निगम सदन मेंसीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया के मेयर सुनील ज्योति के प्रति रवैये को लेकर दर्ज करवाई गई नाराजगी भी गठबंधन के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है। संभव है कि ऐसी स्थिति में दोनों ओर से अप्रत्यक्ष रूप से आजाद उम्मीदवार उतार दिए जाएंगे। फिलहाल भाजपा यह 10 वर्ष बनाम 8 महीने में यह मानकर चल रही है कि वह कांग्रेस की असफलता का लाभ उठा सकती है लेकिन कार्यकर्ता की निराशा गठबंधन के सपने को नेस्तनाबूद कर सकती है।

यह भी हो सकता है वैकल्पिक फार्मूला

80:20 भाजपा के दावे पर अकाली दल की 65:35 पर ही अड़े रहने की जिद के बाद एक अन्य फार्मूला नगर निगम चुनाव में गठबंधन के बीच रखा जा सकता है। चूंकि भाजपा तीन विधानसभा क्षेत्रों में और अकाली दल एक में चुनाव लड़ते हैं। अत: यह फार्मूला रखा जा सकता है कि तीन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा निगम के चुनाव लड़े और एक में अकाली दल सभी सीटों पर चुनाव लड़े। वैसे भी भाजपा ने अपनी तालमेल कमेटी में छावनी से किसी भाजपा नेता को प्रतिनिधित्व न देकर यह प्रकट किया है कि अकाली दल के मुकाबले भाजपा के लिए यह विस क्षेत्र अहम है या नहीं। वैसे छावनी क्षेत्र के अन्तर्गत नगर निगम के 11 वार्ड आते हैं और इन सभी में भाजपा आधार मजबूत है। फार्मूला लागू करने में यह स्थिति 75:25 की औसत नए विकल्प के रूप में भी सामने आ सकती है।

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