अमृतसर ट्रेन हादसा : गेटमैन और आयोजक दोषी, मुख्यमंत्री ने दिए कार्रवाई के आदेश

चंडीगढ़, (मैट्रो नेटवर्क)। अमृतसर ट्रेन हादसे में दोषी पाए गए लोगों के विरुद्ध पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सीधा एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने यह आदेश दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन के समय हुए ट्रेन हादसे की मेजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट आने के बाद दिया है। इस जांच रिपोर्ट में गेटमैन और पुतला दहन के आयोजकों को दोषी माना गया है।
आपको बता दें कि दशहरे के दिन अमृतसर में हुए इस हादसे में 61 लोगों की जान चली गई थी। इसकी जांच की जिम्मेदारी डिवीजन कमिश्नर बी पुरुषार्थ को दी गई थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि किसी आयोजन की देखरेख के लिए बनाए गए नियमों की अनदेखी की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजन और उसकी देखरेख से जुड़े सभी लोगों ने लापरवाही बरती है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस तरह के आयोजन की निगरानी में ऐसी लापरवाही बरती गई हो लेकिन रेलकर्मियों की लापरवाही से हादसा और भयानक हो गया।
हादसे के सभी पहुलओं की जांच के बाद हाल में रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है। हादसे से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रभावित लोगों के बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेल ट्रैक पर खड़े होकर देखने वाले गलती कर रहे थे लेकिन आयोजकों ने भी सुरक्षा के जरूरी इंतजाम के बिना और अनुमति लिए बगैर आयोजन किया। रिपोर्ट में पुलिस और नगर निगम के कर्ताधर्ता अफसरों पर भी इसकी गंभीरता का अंदाजा लगा पाने में विफल रहने की बात कही गई है। साथ ही रेलकर्मी यह सब जानते हुए कि ट्रैक पर भारी भीड़ है, सुरक्षा के जरूरी इंतजाम कर पाने में नाकाम रहे।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जौरा फाटक गेट नंबर 27 का गेटमैन अमित सिंह न केवल अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहा बल्कि सुरक्षा के जो समुचित उपाय हादसे को टालने के लिए वह कर सकता था उसे भी न करके भयानक गलती की है। वही रेलवे का वह कर्मचारी है जिसकी भयानक गलती ने इस हादसे को और भयावह बना दिया।
रिपोर्ट में गेट नंबर 26 के गेटमैन की नाकामी का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि लेबल क्रासिंग नं 26 के गेटमैन निर्मल सिंह ने गेट नंबर 27 के गेटमैन को सूचना देने में देरी करके भयानक गलती की। उसे साढ़े पांच बजे शाम को ही इस भीड़ की सूचना मिल गई थी लेकिन उसने 27 नंबर के गेटमैन को यह सूचना शाम 6.40 या 6.45 बजे दी। उसने संबंधित स्टेशन मास्टर तक को नहीं बताया और गाडिय़ों को आने-जाने दिया। लिहाजा वह भी इस गलती के लिए जिम्मेदार है।
जांच रिपोर्ट में आयोजकों को किसी तरह की अनुमति नहीं लेने के लिए दोषी ठहराया गया है। साथ ही उन्हें धोबी घाट पर दशहरे के मौके पर रावण दहन के दौरान लोगों की सुरक्षा से समझौता करने का भी दोषी माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि न तो लोगों को ट्रैक तक जाने से रोका गया और न ही आयोजकों ने लोगों की सुरक्षा का कोई इंतजाम किया। रेलवे को सूचना देकर भी हादसे से बचाव किया जा सकता था।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डा. नवजोत कौर सिद्धू की उपस्थिति से आयोजन में उनकी कोई भूमिका नहीं दिखती। आयोजक अगर चाहते तो 10 से 12 फिट ऊंचा मंच बनाकर लोगों को रेलवे ट्रैक तक जाने से रोका जा सकता था क्योंकि लोग आयोजन को देखने के लिए रेलवे ट्रैक तक चले गए।

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