आध्यात्मिक शक्ति द्वारा हम बड़े से बड़े दु:ख अनायास ही सहनकर लेते हैं : स्वामी परमानंद

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के जालन्धर स्थित बिधिपुर आश्रम में सत्संग समागम का आयोजन किया गया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वामी परमानंद जी ने कहा कि आध्यात्मिक शांति को प्राप्त करना ही मनुष्य की वास्तविक उन्नति है। आध्यात्मिक उन्नति द्वारा हर प्रकार की उन्नति संभव है। उसे छोडक़र किसी भी उन्नति का फल स्थाई नहीं होता। आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक उन्नति भी होती है। मानसिक शक्तियों के विकसित होने पर भौतिक वस्तुएं स्वाभाविक रूप से प्राप्त होने लगती हैं। भौतिक उन्नति वस्तुत: आध्यात्मिक उन्नति के कारण होती है। प्राचीन काल में आध्यात्मिक उन्नति को ही सर्वोपरि समझा जाता था। यही कारण था कि उस समय के मनुष्य शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक बलों में अद्वितीय थे और आज आध्यात्मिक उन्नति का हास हो रहा है। पांडवों ने विजय प्राप्ति के लिए 12 वर्षों तक वनों में रहकर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का साधन किया था। गंभीरतापूर्वक विचार तथा शास्त्रों का मनन करने में पता चलता है कि आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा हम बड़े से बड़े दु:ख अनायास ही सहनकर लेते हैं। आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होने पर शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक बल स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। जिसे अध्यात्म बल प्राप्त है वह संसार में सदैव अभय रहता है और प्रत्येक संघर्ष में विजयी होता है। आध्यात्मिक उन्नति द्वारा भौतिक उन्नति स्वभाविक है। यह आध्यात्मिक उन्नति मानव शरीर में ही संभव है। व्यक्ति को ऐसा स्वभाव बनाना चाहिए कि वाणी से कभी कठोर शब्द न निकले तथा सहनशीलता के गुणों को विकसित करने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहना चाहिए। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम आध्यात्मिक श1ित के कारण ही अमित शारीरिक बलशाली थे। कत्र्तव्यों का समुचित पालन भी आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है। भौतिक उन्नति ही उन्नति नहीं है। वास्तविक उन्नति तो आध्यात्मिक उन्नति है। भौतिक उन्नति के लिए उतना ही प्रयत्न करना चाहिए जिससे कि हमारा काम चल सके तथा आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग में बाधा न पड़ सके। मानसिक तथा शारीरिक उन्नतियां आत्मोन्नति के बिना अधुरी हैं। हाथी शारीरिक बल में मनुष्य से कई गुणा अधिक बलशाली होता है पर मानसिक बल द्वारा मनुष्य उसे अपने वश में कर लेता है। आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाने में परोपकार का भी विशेष स्थान है।

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