दिव्य ज्योति ने सत्संग कार्यक्रम करवाया

जालन्धर, (मैट्रो सेवा)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बिधीपुर आश्रम में सतसंग कार्यक्रम करवाया गया । जिसमें सर्व श्री आशुतोष जी महाराज क ी शिष्या साध्वी उर्मिला भारती जी ने अपने प्रवचनो में बताया के संतों महापुरूषों ने माटी का पुतला शरीर को कहा है और वह अपनी वाणी के माध्यम से समझा रहें है कि हे शरीर तू तो स्थूल है,निष्प्राण है, पाँच तत्वों से निर्मित है पर फिर भी तू कैसे जिंदगी की तान पर नाचता है। कोई तो जीवन ऊर्जा होगी जो तेरे इस शरीर रूपी यंत्र को चलायमान रखती है।
समय-समय पर हमारे महापुरूषों ने समस्त मानव जाति को यही समझाया है कि हमारी भौतिक और नश्वर देह के अंदर एक अभौतिक और अविनाशी जीव सत्ता है जिसके कारण हम जीवित है, क्रियाशील है और इस सत्ता को आत्मा कहा गया है। इसलिए भारत के तत्वज्ञानियों ने हमें एक चार-स्तरीय आज्ञा दी-आत्मा वा अरे श्रोतव्यो- तुम आत्मा के विषय में अवश्य सुनो, उस पर वैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा तथ्य खोजो। और फिर मन्तव्यों- इन आत्मा संबधी तथ्यों,तर्कों,जानकारियों पर मनन चिंतन करो। फिर द्रष्टवय-अपने भीतर आत्मा का दर्शन,उसके उज्जवल स्वरूप का साक्षात्कार करो।
उसके उपरान्त निदिध्यासितव्यो- उस पर एकचित ध्यान अभयास करो। लेकिन प्रश्र यह है कि हम आत्मा का साक्षात्कार किस प्रकार करें। इस विषय में कठोपिनषद में कहा गया है-एष सर्वेषु भूतेषु गूढात्मा न प्रकाशते-सर्वभूत चेतन प्राणियों में एक गूढ़ आत्मा छिपी हुई है,प्रकट नहीं है। परन्तु उसे प्रकट किया जा सकता है। सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभि- दिव्य दृष्टि के द्वारा। पूर्ण गुरू ब्रहमज्ञान के माध्यम से मानव को दिव्य दृष्टि प्रदान करते है जिससे वह अपने भीतर परमात्मा का दर्शन कर सकता है।

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