दिव्य ज्योति ने साप्ताहिक सत्संग करवाया

जालन्धर, (मैट्रो सेवा)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा बिधीपुर आश्रम में साप्ताहिक सतसंग करवाया गया , इसमें सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री अद्ब्रिति भारती जी ने प्रभु श्री राम जी के जीवन कों सम्बोधन करते हुए कहा कि ,उनके जीवन में त्याग की भावना हमें ये सिखाती है कि हमें एकजुट होकर सदभाव से रहना चाहिए , नैतिक मुल्यों को अपने जीवन में धारन करना चाहिए, तभी हम सभ्यत व संस्कारी जीवन व्यतीत कर सकते हैं , श्री राम का जन्म व उनकी लीलाएँ दोनों ही दिव्य हैं, श्री राम अनादि हैं जिन्हें किसी देश काल या जाति की संकीर्र्ण परिधि में नहीं बाँधा जा सकता। वह परमात्मा जो अखंड है उनके अवतरण के पीछे कुछ एक परिस्थितियाँ होती हैं जिनकेवशीभूत वह परम सच्च इस धरा पर अवतरित होती है। जब – जब भी समाज में अत्याचार, भ्रष्टाचार, पापाचार में वृद्धि हुई तब – तब वह परमतत्व इस धरा पर समाज के कल्याण हेतु साकार रूप लेकर आया और यही स्थिति आज समाज की है आज भी जरूरत है ऐसी अवतरित स8ाा की जो दिशा विहीन मानवीय इकाई को दिशा प्रदान करके समाज में शांति का प्रसार कर सके। साध्वी जी ने गोमाता के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गो प्राचीन काल से ही हमारी सभ्यता का प्रतीक रही है। इसे माँ का दर्जा दिया गया। इसके साथ मानव का गहरा रिश्ता है। जिस समय बच्चे का जन्म होता है तो वह अपनी माँ के दूध का पान करता है। परन्तु जब वह बड़ा होता है तो माँ के दूध के बाद जो दूध उसे दिया जाता है वह होता है गो माता का। किन्तु आधुनिक मानव अपनी उसी माँ को आज घर में रखना तक पसन्द नहीं करता और जो रखते भी है वह भी तब तक जब तक गो दूध देती है। ज्यों ही वह दूध देना बंद करती है तो उसे घर से बाहर निकाल देते हैं। पुरातन समय में गोमाता की पूजा करते थे, बुढ़ापे में उसकी सेवा करते थे। किन्तु आज के परिवेश में यह संस्कार लुप्त हो चुके हैं।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *