दिव्य ज्योति ने साप्ताहिक सत्संग करवाया

जालन्धर, (मैट्रो सेवा)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से जालंधर विधिपुर आश्रम में सप्ताहिक सतसंग का आयोजन किया गया जिसके भीतर परम पूजनीय श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्य साध्वी मनजीत भारती जी ने कहा कि आज प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन के लक्ष्य को भूल चुका है। यदि मनुष्य को मशीन कहा जाए तो इसमें कोई गलत नही होगा क्योंकि आज मनुष्य भावनाओं से रहित हो चुका है। मनुष्य के कार्य इस समान है जैसे मशीन होती है जो कार्य तो सब करती है लेकिन भावनाओं से रहित होकर। इस प्रकार समाज में नशा खोरी, अशलीलता, पैसे के लिए अपराध यह सब कुरीतियाँ मानव ने ही पैदा की है। इस प्रकार यदि हम समाज में बदलाव चाहते हैं तो हमें सबसे पहले मानव को ही बदलना होगा। उन्होंने कहा कि इस अंधकारमय समाज में मनुष्य के जीवन शब्दकोश में भाईचारा, सद्भावना जैसे शब्द ही खत्म होते जा रहे हैं जिस कारण आज सारा विश्व अशांत होकर बारूद के ढेर पर बैठा है इस समय जरूरत है जलते हुए दीपक की जिससे अज्ञानता के अंधेरे को नाश किया जा सकता है,जैसे जलते हुए दीपक के पास बैठकर प्रकाश अपने आप ही मिल जाता है इस प्रकार जीवन में एक पूर्ण सदगुरू का आगमन होता है तो जीवन प्रकाशित हो जाता है। सद्गुरू भक्त के हदय में प्रकाश को प्रकट कर देते हैं। जब मनुष्य अंत:करण में उतरकर प्रकाश के सहारे ध्यान करता है तब उसकी सोच में बदलाव आता है। वह एक संस्कारी मनुष्य बनकर अपने जीवन को व्यतीत करता है। आज परमात्मा का मार्ग भूल जाने के कारण ही इन्सान गलत रास्ते पर चलकर अपना पतन कर रहा है। जिस कारण वह शराब कबाब और बुराईयों का आदि हो चुका है और अपने जीवन को बर्बाद कर रहा है। यदि आज मनुष्य उन्नति चाहता है तो उसे पूर्ण गुरू की शरणागति जाना पड़ेगा जो उसे परमात्मा से जोड़ दे क्योंकि गुरू के बिना कोई भी मनुष्य संसार रूपी भवसागर से पार नही हो सकता।

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