धार्मिक भावनाओं के शोषण से सामाजिक टकराव पैदा करने की कोशिश

केंद्र को उसकी नीतियों से पैदा हो रही आशंका को दूर करने की ज़रूरत

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र के चुमियारा गांव में गुरु रविदास जी के ऐतिहासिक मंदिर को क्षति पंहुचाये जाने की घटना को लेकर मंगलवार को हुए पंजाब बंद के दौरान समाज की धार्मिक भावनाओं का शोषण करते हुए किसी ने खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश की तो किसी ने अलगाववाद और साम्प्रदायिक टकराव पैदा करने के अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए वातावरण तैयार करने का प्रयास किया। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों पर अमल स्वरूप हुई इस घटना से विशेषत: रविदास नाम लेवा संगत की भावनाएं आहत हुई है और भारतीय समाज के विभिन्न सम्प्रदायों ने सोमवार को ही एक स्वर से इस की निंदा की थी और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार को आदेश देने का आग्रह किया गया था। सर्वप्रथम जालन्धर से ब्राह्मण कल्याण परिषद, हिन्दू जागृति मंच, वाल्मीकि एवं रविदासिया सम्प्रदाय की संस्थाओं ने संयुक्त रूप से ज्ञापन दिया था लेकिन इस के बावजूद बंद के दौरान इस घटना को मनुवाद और अन्य दर्शनों में टकराव बता कर अपने अपने उद्देश्य पूरा करने की कोशिश की गई। मनुवाद के विरुद्ध अनुसूचित जाति समाज और अल्पसंख्यक वर्ग की एकता का आह्वान कर टकराव के लिए तैयार रहने की तकरीरें अलगाववादी और साम्प्रदयिक तत्वों ने खुल कर की। इसी उद्देश्य से ऐसे तत्वों ने बंद के दौरान कई स्थानों पर हिंसा करके अति शिक्षित रविदासिया समाज की छवि धूमिल करने में भी कसर नहीं छोड़ी। हालांकि भारतीय समाज के रविदासिया, वाल्मीक और अन्य समुदायों के स्थानीय सुपरिचित नेताओं ने सिर्फ केंद्र सरकार के प्रति रोष व्यक्त किया और सामाजिक एकता का आह्वान किया इसके बावजूद अन्य तत्वों ने अपने अपने उद्देश्य साधने के लिए अवसर का लाभ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसे तत्वों ने गुरु रविदास जी के समानता के समाज के दर्शन की परवाह न करते हुए सामाजिक टकराव के आसार पैदा करने की जमीन तैयार करने की कोशिश की गई। घटना को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजाब प्रमुख के हवाले से भी निंदा औऱ मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग का वक्तव्य शरुआती चरण में दिया गया और अकाली भाजपा गठबन्धन के अनुसूचित जाति वर्ग का एक शिष्टमंडल भी घटना की संवेदनशीलता को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री हरदीप पूरी और दिल्ली के उपराज्यपाल से भी मिला लेकिन पंजाब में सत्तारू? कांग्रेस ने बंद को इस प्सुनियोजित ढंग से समर्थन देकर देश में खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने का माहौल तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि बंद के दौरान एक पहलू ऐसा भी दिखा जो यह संकेत लिए हुए था कि धारा 370 को निष्क्रिय बनाने के बाद कश्मीर की हुई घेराबंदी से अल्पसंख्यकों और गैर स्वर्णो में डर और अविश्वास बढ़ा है। फगवाड़ा में धरना प्रदर्शन में कई तकरीर कर्ताओं ने कश्मीर का जिक्र साफ रूप से किया। प्रबुद्घ वर्ग इस बात से हैरान है कि जब केंद्र की भाजपा नीत सरकार देश में सबका साथ सबका विकास के बाद सब का विश्वास जुटाने का नारा लगा रही है ,तो फिर विश्वास टूटने का अवसर क्यों पैदा होने दे रही है। प्रबुद्धों का कहना है कि मंदिरों की सरंक्षक होने की छवि वाली भाजपा की सरकार से यह चूक कैसे हो गई कि उसकी नाक तले गुरु रविदास जी के ऐतिहासिक मंदिर को क्षति पंहुची और मंदिर की विशाल भूमि भी एक सरकारी प्राधिकरण के नाम सर्वोच्च अदालत के फैसले से कर ली गई तथा संतो तक को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना से जहां भाजपा का अनुसूचित जातिवर्ग में बामुशक्कत बना आधार खिसकने लगा है वहीं अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति वर्ग में अंसतोष पनपाने की कोशिशें करने वालों की सक्रियता और उग्रता यह संकेत दे रही है कि देश में सामुदायिक टकराव के आसार बन रहे है।ऐसी संभावित स्थिति न केवल भाजपा को क्षति पहुँचा सकती है अपितु मृत प्राय: हो चुकी वामपंथी एवं अलगाववादी सोच को भी ऑक्सीजन देने का काम करेगी। गुरु रविदास जी का मंदिर हर हाल में बनना चाहिए लेकिन समानता का उनका सिद्धांत भी सदैव हमारे मन मन्दिरों स्थापित रहे यह प्रत्येक पक्ष को हमेशा याद रहना चाहिए।

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