पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में जमकर हुए घोटाले

सूबे में सही लाभपात्रों का ही पता नहीं, हर साल बढ़ी संख्या

चंडीगढ़, (मैट्रो नेटवर्क)। पंजाब के निजी व सरकारी कालेजों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप (पीएमएस) योजना में अनियमितताओं का मुद्दा लोकसभा तक पहुंच गया है। मंगलवार को संसद में रखी गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सहित पांच राज्यों में एससी विद्यार्थियों की पीएमएस योजना में बड़ा घोटाला हुआ है। पंजाब में 6.29 लाख स्कालरशिप के दावों में 3275 विद्यार्थियों के कागजात का एक से अधिक बार उपयोग करते हुए शैक्षणिक संस्थानों ने दोहरी स्कालरशिप राशि हड़पी, वहीं अनेक शैक्षिक संस्थानों ने एससी विद्यार्थियों से रजिस्ट्रेशन फीस, एग्जामिनेशन फीस, स्कूल फंड आदि के नाम पर पैसा तो वसूली ही, इन मदों के लिए सरकार से भी पीएमएस के तहत मोटी रकम हासिल कर ली, जो उन्होंने एससी विद्यार्थियों को नहीं लौटाई। कैश ने अप्रै, 2012 से मार्च, 2017 तक सूबे के 6 जिलों के शैक्षिण संस्थानों के दस्तावेज की जांच करते हुए 15,63 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा अपनी रिपोर्ट में किया है। इसके साथ ही कैग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि छात्रवृति के अनियमित भुगतान के उदाहरणों के प्रकाश में, मंत्रालय का ऐसे अनियमित भगुतान या दुर्भावना के जोखिम को कम करने के लिए सभी समान मामलों की जांच करनी चाहिए। पंजाब में पीएमएस के भुगतान की भी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई। हालांकि योजना में यह निर्देश है कि लाभपात्र को उनके बैंक खातों के जरिए समय पर वजीफे का भुगतान किया जाए लेकिन पंजाब में 2012-16 के दौरान सरकार ने एससी विद्यार्थियों को फंड रिलीज करने में सरकार ने देरी की जबकि 2017 कर 3.21 लाख छात्रों को वजीफा जारी नहीं हो सकता था। इसके अलावा, पीएमएस का लाभ लेने के बाद सफलतापूर्वक अपनी शिक्षा पूरी करने वाले लाभार्थियों की संख्या का भी कोई रिकार्ड राज्य सरकार के पास नहीं है। जिन विद्यार्थियों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी, उनके वजीफे का हिसाब भी नहीं रखा गया। इसके अलावा पंजाब मेें स्कालरशिप की राशि के भुगतान की कोई निश्चित टाइमलाइन भी नहीं है। पीएमएस योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर साल मई-जून में स्कालरशिप के लिए आवेदन मांगे जाने हैं, जिनकी जांच के बाद उनका विवरण सरकारी खजाने को भेजा जाना है ताकि समय पर स्कालरशिप की राशि का भुगतान हो सके।
पंजाब में 2012 में नवम्बर माह में एस.सी. विद्यार्थियों से आवेदन मांगे गए, जबकि 2013 में एक जुलाई से, 2014 में 26 जून से, 2015 में 29 दिसम्बर से और 2017 में 4 जनवरी को आवेदन मांगे गए। आवेदन मांगने के इस लापरवाह तरीके की भांति ही पंजाब सरकार द्वारा केन्द्र से पीएमएस योजना के तहत प्रस्ताव भेजने में भी समयसीमा का कोई ख्याल नहीं रखा गया। कई बार तो वित्त वर्ष समाप्ति के समय राज्य सरकार ने केन्द्र को प्रस्ताव भेजा।

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