गैंगस्टर के लिए ‘गदर’, नागौर से दिल्ली तक टेंशन

जयपुर, (मैट्रो नेटवर्क)। आनंदपाल सिंह एनकाउंटर केस ने राजस्थान की की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राजपूत समाज ने एनकाउंटर को फर्जी घोषित कर दिया है। आनंदपाल का परिवार इस एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। आनंदपाल के शव का अंतिम संस्कार करवाने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आनंदपाल के परिजनों और राजपूत समाज की समझौता वार्ता बुधवार देर रात तक जारी रही। परिजन इस शर्त पर 16 जुलाई को अंतिम संस्कार करने को तैयार हैं कि सरकार लिखित में सीबीआई जांच की बात कहे। इस बीच सूत्रों की माने तो नागौर में हालात को देखते हुए वसुंधरा सरकार आज एनकाउंटर की सीबीआई जांच की घोषणा कर सकती है। इससे पहले नौगार में हालात बेकाबू होता देख देर रात मुख्यमंत्री आवास में आपातकालीन मीटिंग बुलाई गई। इस बैठक में भाग लेने के लिए वसुंधरा सरकार में मंत्री राजेंद्र राठौड़, गजेंद्र सिंह खींवसर, डीजीपी मनोज भट्ट, गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया पहुंचे।
इस बीच सूत्रों की माने तो बुधवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री वसुंधार राजे को फोन कर नागौर हिंसा पर जानकारी ली। यहां आपको बता दें कि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी पिछले दिनों गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले थे। सभी ने आंनदपाल सिंह के एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की थी। गृह मंत्री ने इन मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था।
इधर, आनंदपाल मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने वसुंधरा सरकार को अपनी शक्ति और दायित्व का प्रयोग कर दाह संस्कार करवाने का अंतरिम आदेश दिया है। जयपुर स्थित सवाई मान सिंह अस्पताल प्रशासन ने सारी तैयारी कर ली है। सभी डॉक्टरों को बुलाया गया है। वहीं राजपूत समाज ने घोषणा की है कि अगर सीबीआई जांच की मांग नहीं मानी गई तो आनंदपाल का शव लेकर वे राजधानी जयपुर कूच करेंगे।
दूसरी तरफ मुसीबत ये भी है कि आनंदपाल को जुर्म की दुनिया में शह देने को लेकर सरकार के 4 वरिष्ठ मंत्रियों का नाम सामने आ रहा है। आनंदपाल के वकील ने दावा किया है कि जल्द ही वे इन मंत्रियों से जुड़े सबूत कोर्ट और मीडिया को उपलब्ध कराएंगे जो साबित कर देंगे कि कैसे आनंदपाल को सियासी लोगों ने अपने फायदे पूरे होने तक शह दी और जब आनंदपाल सिंह उनके राजनीतिक वजूद के लिए खतरा बन गया तो एनकाउंटर के बहाने उसकी हत्या कर दी गई।
ब्राह्मण और जाट विधायकों के साथ ही राजपूत समाज के जबरदस्त विरोध को देखते हुए राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में संभावनाओं और आशंकाओं के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल, राजस्थान में 2018 चुनावी साल है। 2013 में मोदी लहर के चलते भाजपा ने 200 में से 163 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसी लहर पर सवार पार्टी ने 2018 के लिए 180 सीटों का टारगेट तय कर लिया लेकिन पहले ही अंदरुनी खींचतान में उलझी सरकार के लिए हालात अब उतने आसान नहीं लग रहे हैं।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *