कर्नाटक में सरकार का गठन : कांग्रेस-जेडीएस के बीच डिप्टी सीएम को लेकर फंसा है पेंच

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात में कैबिनेट बंटवारे को लेकर चर्चा हुई। कुमारस्वामी ने भले इस मुलाकात को सद्भावनापूर्ण मुलाकात बताया हो मगर इसका असली मकसद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन का खाका खींचना था। इस मुलाकात की सबसे बड़ी वजह थी डिप्टी सीएम का पद। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस दोनों गठबंधन सहयोगियों के बीच बैलेंस बनाने के मकसद से दो उपमुख्यमंत्री चाहती है जबकि जेडीएस इसके लिए तैयार नहीं।
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों पर नजरें गड़ाए कांग्रेस राज्य में दो उपमुख्यमंत्री बनाकर यहां जाति का गणित साधना चाहती है। हालांकि यहां विभिन्न समुदाय अपने नेता को इस कुर्सी पर बिठाने के लिए दबाव बनाते दिख रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए इन सभी को खुश करना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष जी परमेश्वर उपमुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बताए जा रहे हैं। परमेश्वर दलित जाति से आते हैं और उन्हें यह अहम जिम्मा देने से कांग्रेस को उम्मीद है 2019 के चुनावों में दलितों का वोट उनके पाले में वापस आ सकेगा।
उधर उत्तर कर्नाटक से आने वाले एचके पाटिल और एमबी पाटिल जैसे दिग्गज लिंगायत नेता भी इस पद पर नजरें गड़ाए हैं। कांग्रेस के लिंगायत नेताओं के धड़े ने भी मांग की है कि चूंकि दक्षिण कर्नाटक से जीतने वाले वोक्कालिगा नेता कुमारस्वामी को सीएम बनाया जा रहा है ऐसे में डिप्टी सीएम का पद उत्तर कर्नाटक से आने लिंगायत नेता को मिलना चाहिए।
कांग्रेस के पास 16 और जेडीएस के पास 4 लिंगायत विधायक हैं। वहीं लिंगायतों की मांग मानने से कांग्रेस को सिद्धारमैया सरकार के दौरान मिला लिंगायत विरोधी दल के तमगे से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।
वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय से भी मांग उठ रही है कि उनके किसी नेता को इस पद पर बिठाया जाए। कांग्रेस के एक विधानपार्षद ने कहा कि अगर आप उन 78 सीटों पर नजर डालें जहां कांग्रेस को जीत मिली तो उनमें से 50 से ज्यादा सीटों पर मुस्लिमों का अहम रोल रहा जिन्होंने एकमुश्त कांग्रेस को वोट दिया। वह कहते हैं कि हमने कांग्रेस के लिए काफी बलिदान दिए हैं। अगर पार्टी इसका मान नहीं रखती और उनके सपोर्ट का इनाम नहीं देती तो फिर मुस्लिम भी कांग्रेस को सबक सिखाने से हिचकेंगे नहीं।
इस बीच कांग्रेस के संकटमोचक डीके शिवकुमार का भी नाम डिप्टी सीएम पोस्ट की रेस में आगे बताया जा रहा है। कर्नाटक विधानसभा में शनिवार को हुए शक्तिपरीक्षण के दौरान शिवकुमार ने सभी कांग्रेसी विधायकों को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई थी। शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाना उनकी मेहनत का इनाम माना जाएगा लेकिन वह कुमारस्वामी की ही तरह वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। ऐसे कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि सीएम और डिप्टी सीएम दोनों ही वोक्कालिगा हों। ऐसे में कांग्रेस राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लिंगायत को डिप्टी सीएम बनाए या फिर 2019 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक दलित और एक मुस्लिम नेता को यह जिम्मा सौंपे। हालांकि यह सब जेडीएस के साथ सौदेबाजी पर निर्भर करेगा।
वहीं राहुल से मुलाकात के बाद कुमारस्वामी से जब पत्रकारों ने डिप्टी सीएम को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कुछ भी खुलकर नहीं बताया। कुमारस्वामी ने बस यह ही कहाकि राहुल जी ने सारी प्रक्रिया साफ कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहाकि उन्होंने कर्नाटक कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल को इन सारे मुद्दे पर चर्चा कर अंतिम फैसले का अधिकार दिया है। अब स्थानीय नेता मंगलवार को बैठकर सारी चीजें तय करेंगे।

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