अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान ने हाफिज सईद को आतंकवादी घोषित किया

इस्लामाबाद, (मैट्रो नेटवर्क)। पाकिस्तान ने मुम्बई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को आतंकवादी घोषित कर दिया है। समझा जा रहा है कि पाकिस्तान ने अमेरिका के चौतरफा दबाव को देखते हुए आतंकवाद पर अपने रुख में परिवर्तन किया है।
मंगलवार को पुलिस ने लाहौर में हाफिज के संगठन जमात-उद-दावा के कार्यालय के बाहर से सुरक्षा बैरिेकेड को हटा लिया। लाहौर के डीआईजी डा. हैदर अशरफ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 26 जगहों से सुरक्षा बैरिकेड हटाए गए हैं। इन बैरिकेड को 10 साल पहले सुरक्षा के नाम पर यहां लगाए गए थे।
मंगलवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने ‘एंटी टेरेरिज्म एक्ट’ से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसके तहत अब पाकिस्तान सरकार को लश्कर-ए-तैय्यबा, जमात-उद-दावा, हरकत-उल-मुजाहिदीन, लश्कर-ए-झांगवी, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) जैसे आतंकी संगठनों और उनसे जुड़े लोगों के दफ्तर और बैंक खाते बंद करने होंगे जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सूची में शामिल हैं।
पाकिस्तान सरकार के नए कानून के बाद आतंकी गतिविधियों में शामिल संगठनों की फंडिंग पर असर पड़ेगा। पाकिस्तान अब तक हाफिज सईद को एक धार्मिक नेता और अपना मददगार मानता था। वहां की सरकार ने न सिर्फ उसे पनाह दे रखी थी बल्कि अब तक उसे किसी स्टेट गेस्ट की तरह सुरक्षा भी मुहैया कराती आई थी।
हाफिज को 2008 में मुम्बई में हुए आतंकी हमले की साजिश रचने वाला माना जाता है। इस भयानक हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ यह कदम अमेरिका की सख्ती और पिछले दिनों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दी कड़ी चेतावनी को देखते हुए उठाया है। ट्रंप ने बीते 1 जनवरी को आतंकवाद के खिलाफ उचित कदम नहीं उठाने पर पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई थी। ट्रंप ने ट्वीट कर पाकिस्तान पर झूठ बोलने और धोखा देने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने लिखा था पिछले 15 वर्षों में अमेरिका की तरफ से दी गई 33 अरब डॉलर की आर्थिक मदद के बदले पाकिस्तान कुछ नहीं दिया।
आपको बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान ने साल 2005 में यूएनएससी प्रस्ताव 1267 के तहत लश्कर-ए-तैयबा को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। पाकिस्तान सरकार ने यह कदम 18 से 23 फरवरी तक पेरिस में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक से ठीक पहले लिया। ऐसा माना जा रहा था कि अमेरिका के दबाव में आकर एफएटीएफ पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में न डाल दे। इस बैठक में मनी लॉन्डरिंग जैसे मामलों को लेकर अलग-अलग देशों की निगरानी होती है।

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