इसरो जासूसी कांड : वैज्ञानिक नंबी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मिलेगा 50 लाख का मुआवजा

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। उच्चतम न्यायालय ने कहाकि इसरो जासूसी मामले में वैज्ञानिक एस नंबी नारायणन को बेवजह गिरफ्तार किया गया, परेशान किया गया और मानसिक प्रताडऩा दी गई। साथ ही इसरो वैज्ञानिक को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने जासूसी मामले में नारायणन को आरोपित किए जाने की जांच के लिए अपने पूर्व न्यायामूर्ति डीके जैन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पैनल गठित किया। 1994 में जासूसी मामले में बरी होने के बाद से नारायणन कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया था। कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त जज डीके जैन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी जिसने केरला पुलिस द्वारा वैज्ञानिक को गिरफ्तार किए जाने की जांच की। कोर्ट ने कहाकि नंबी नारायण को गिरफ्तार करना गैरजरूरी और गलत था।
इसरो जासूसी कांड साल 1994 का वह मामला है जिससे भारत की अंतरिक्ष के क्षेत्र की तरक्की 15 साल पिछड़ गई। इसरो उस समय क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन पर काम कर रहा था और वह उसे बनाने के बिल्कुल करीब था। तभी उसकी तकनीक के लीक होने की चर्चा उड़ गई और उसकी केरल पुलिस ने एसआइटी जांच शुरू करा दी। इसी जांच के दौरान क्रायोजेनिक इंजन विभाग के प्रमुख नंबी नारायणन गिरफ्तार कर लिए गए और अनुसंधान का कार्य पटरी से उतर गया। भारत के पिछडऩे का सीधा लाभ अमेरिका और फ्रांस को मिला।
केरल पुलिस ने दावा किया था कि वैज्ञानिक ने कुछ गुप्त दस्तावेज पाकिस्तान को दिए थे। हालांकि जांच के बाद सीबीआई ने इन आरोपों को झूठा करार दिया था। इसके बावजूद दोबारा जांच के आदेश दिए गए लेकिन 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को रद्द कर दिया था। इसके बाद नारायणन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचे। आयोग ने उन्हें 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि वह इस फैसले से खुश नहीं हुए और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट के फैसले के बाद नंबी ने कहाकि मैंने अभी आदेश नहीं देखा है। मुझे केवल इतना पता है कि 50 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर मिलेंगे और एक न्यायिक जांच होगी।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *