अंतरिक्ष में इसरो का शतक, 31 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

श्रीहरिकोटा, (मैट्रो नेटवर्क)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को अपने अंतरिक्ष केंद्र से दूरसंवेदी कार्टोसैट और 30 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। 44.4 मीटर ऊंचे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) ने 28 घंटों की उल्टी गिनती के बाद शुक्रवार सुबह 9.29 बजे उड़ान भरी। प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट और 18 सेकंड के बाद 320 टन वजनी रॉकेट से एक-एक करके उपग्रह अलग होते गए और पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हुए। यह अंतरिक्ष केंद्र बंगाल की खाड़ी तट से चेन्नई के 80 किलोमीटर पूर्वोत्तर में है। इन 31 उपग्रहों में से तीन भारत के और बाकी कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के हैं। भारतीय उपग्रहों में पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम वजनी कार्टोसैट-2 सीरीज का उपग्रह इस मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ ही सहयात्री उपग्रह भी हैं जिनमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल है। कार्टोसैट-2 सीरीज का उपग्रह रॉकेट से सबसे पहले अलग हुआ और पृथ्वी से 505 किलोमीटर ऊपर सूर्य की तुल्यकालिक कक्षा में प्रवेश कर गया। इसके बाद 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह और 100 किलोग्राम का माइक्रो उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित हुए। कार्टोसैट-2 सीरीज का उपग्रह पांच वर्षों के लिए पृथ्वी की कक्षा के आसपास रहेगा। माइक्रो उपग्रह पृथ्वी की कक्षा के आसपास रहने वाला भारत का 100वां उपग्रह होगा।
भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए न किया जाए, अगर ऐसा होता है तो इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।
ऐतिहासिक लांचिंग की 10 खास बातें :
1. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का 100वां उपग्रह लॉन्च हो गया है। ये 100वां सेटेलाइट कार्टोसेट-2 है। इसके साथ ही 30 अन्य सैटेलाइट इसके साथ इसरो में अंतरिक्ष में भेजे हैं। पिछले साल अगस्त में नाकाम हुई उड़ान के बाद इसरो ने उन खामियों को दूर कर लिया है।
2. इन 31 सैटेलाइट को लेकर इसरो का जो रॉकेट अंतरिक्ष लेकर गया है उसका नाम पीएसएलवी-सी40 है। यह रॉकेट जिन 31 सैटेलाइट को अपने साथ लेकर गया उसमें सबसे भारी कार्टोसैट-2 है।
3. सेटेलाइट का लॉन्च एक मिनट देर से हुआ लेकिन यह बहुत सफलता के साथ हुआ। चारों चरण सामान्य तरीके से पूरे किए गए।
4. 31 सैटेलाइट में एक भारतीय माइक्रो सैटेलाइट और एक नैनो सैटेलाइट के अलावा 28 छोटे विदेशी उपग्रह हैं।
5. पृथ्वी के अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 प्राथमिक उपग्रह है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल है।
6. पीएसएलवी-सी40 की ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 320 टन है। पीएसएलवी का यह रॉकेट अपने साथ कुल 1332 किलो वजन के 31 उपग्रह लेकर गया है।
7. 09.29 बजे की लॉन्च के बीस मिनट के भीतर सैटेलाइट एक-एक करके पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में स्थापित होने लगे। सबसे पहले कार्टोसेट-2 कक्षा में स्थापित हुआ। इसके बाद एक एक करके दूसरे उपग्रह स्थापित होते चले गए।
8. इसरो का रॉकेट जिन देशों के सैटेलाइट लेकर अंतरिक्ष में लेकर गया है उसमें कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, गणराज्य कोरिया, यूके और यूएसए के माइक्रो और नैनो उपग्रह शामिल हैं। 28 उपग्रहों में 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।
9. इन 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों को इसरो और एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों के तहत लॉन्च किया गया।
10. इससे पहले 31 अगस्त 2017 में इसरो का सैटेलाइट लांच प्रोग्राम नाकाम रहा था लेकिन इस बार इसरो के वैज्ञानिकों ने कोई खामी इस लांच में नहीं रहने दी। सब कुछ बहुत व्यवस्थित तरीके से होता चला गया। हर चरण सामान्य तरीके से पूरा हुआ। पीएसएलवी-सी40 साल 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है।

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