माता सिमसा नि:संतान दम्पतियों को देती है संतान का आर्शीवाद

कपूरथला, (साहिल गुप्ता)। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लड-भड़ोल तहसील के सिमस नामक खूबसूरत स्थान पर स्थित माता सिमसा मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। माता सिमसा या देवी सिमसा को संतान-दात्री के नाम से भी जाना जाता है। हर वर्ष यहां सैंकड़ो नि:सन्तान दंपति सन्तान पाने की इच्छा ले कर माता सिमसा के दरबार में आते हैं। माता सिमसा मंदिर में नवरात्रों में होने वाले इस विशेष उत्सव को स्थानीय भाषा में सलिन्दरा कहा जाता है। सलिंदरा का अर्थ है स्वप्न अथवा सपने। नवरात्रों में महिलाएं सोती हैं फर्श परनवरात्रों में नि:संतान महिलाएं माता सिमसा मंदिर परिसर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं। विश्वास है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से मंदिर में आती है माता सिमसा उन्हें स्वप्न में मानव रूप में या प्रतीक रूप में दर्शन देकर संतान का आशीर्वाद प्रदान करती है। देवी सिमसा आने वाली संतान के लिंग-निर्धारण का भी संकेत देती है। जैसे कि, यदि किसी महिला को अमरुद का फल मिलता है तो समझ लें कि लडक़ा होगा। अगर किसी को स्वप्न में भिंडी प्राप्त होती है तो समझें कि संतान के रूप में लडक़ी प्राप्त होगी। यदि किसी को धातु, लकड़ी या पत्थर की बनी कोई वस्तु प्राप्त हो तो समझा जाता है कि उसके संतान नहीं होगी। माना जाता है कि नि:संतान बने रहने का प्रतीक-स्वरुप स्वप्न प्राप्त होने के बाद भी यदि कोई औरत दूसरा स्वप्न देखने का हठ करती है और अपना बिस्तर मंदिर परिसर से नहीं हटाती है तो उसके शरीर में खुजली भरे लाल-लाल दाग उभर आते हैं और उसे मजबूरन वहां से जाना पड़ता है। कई मामलों में तय अवधि कि समाप्ति तक महिला के स्वप्न में कुछ नहीं आता। इसका अर्थ संभवत: नकारात्मक ही होता है परंतु वे अगली बार प्रयास अवश्य कर सकती हैं। संतान प्राप्ति के बाद लोग अपना आभार प्रकट करने सगे-संबंधियों और कुटुम्ब के साथ माता सिमसा मंदिर में आते हैं। यहां के आसपास और दूर पार के इलाकों में ऐसे कई दम्पति मिल जाते हैं जिन्हें माता के स्वप्न के बाद संतान की प्राप्ति हुई। माता सिमसा मंदिर पक्के सडक़ संपर्क मार्ग से जुड़ा है। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खासतौर पर नवरात्रों में यहां भीड़ अधिक रहती है तथा उत्सव का माहौल होता है। गर्मियों के मौसम में यहां 2 दिवसीय मेला लगता है जिसमे दूर-दूर से लोग मां के दरबार में हाजरी भरने आते हैं।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *