दशकों तक राजनीतिक दुश्मन रहे मुलायम के लिए वोट मांगेंगी मायावती

लखनऊ, (मैट्रो नेटवर्क)। आम चुनाव 2019 के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग ने देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में सात चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया जिसमें 11 अप्रैल से 19 मई तक मत डाले जाएंगे। यूपी की मौजूदा सियासी समीकरण में एसपी-बीएसपी- आरएलडी गठबंधन के सामने बीजेपी है और कांग्रेस अपनी खोई जमीन तलाश रही है। एसपी-बीएसपी के कद्दावर नेताओं को यकीन है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन महज किसी कलम नीली या काली स्याही से किसी सफेद पेपर पर कुछ शब्दों का ऐलान नहीं है बल्कि कागज पर लिखी गई इबारतें जमीन पर तब्दील होंगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या मुलायम सिंह यादव के लिए मायावती प्रचार करेंगी। इस सवाल का जवाब हां में है। बीएसपी और एसपी के नेता मैनपुरी में साझा रैली करेंगे। लेकिन इससे भी बड़ी उस साझा रैली को मायावती संबोधित भी करेंगी। मायावती के संबोधन का मतलब है कि वो एसपी उम्मीदवार  मुलायम सिंह यादव के बारे में भी दो शब्द बोलेंगी।
आज से 24 साल पहले 1995 में लखनऊ स्थित गेस्ट हाउस कांड को कौन भूल सकता है। सत्ता हस्तांतरण को लेकर एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन हुआ था। शर्तों के तहत एसपी और बीएसपी को ढाई-ढाई साल तक यूपी की जनता का कल्याण करना था। मुलायम सिंह यादव को सत्ता मायावती के हाथों में सौंपनी थी। लेकिन जब वो समय आया लखनऊ का स्टेट गेस्ट हाउस एक ऐसी घटना का गवाह बना जिसे देश और दुनिया स्टेट गेस्ट हाउस कांड के नाम से जानती है। मायावती की जान किसी तरह से बची थी और उन्हें बचाने के लिए बीजेपी के कद्दावर नेता आए जिसमें लाल जी टंडन प्रमुख थे। उस घटना के बाद मायावती ने लाल जी टंडन को राखी भाई माना और कहा कि बीजेपी और बीएसपी के गठबंधन का साक्षी सूरज और चंद्रमा हैं। लेकिन राजनीति में दोस्ती या दुश्मनी का स्थाई भाव नहीं होता है और समय गुजरने के साथ दोनों के बीच की राजनीतिक दोस्ती बेपटरी हो चली।

बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी मजबूती के साथ लोकसभा का चुनाव लड़ेगी और गठबंधन के साथ भी मजबूती से खड़ी रहेगी। बीएसपी प्रमुख मायावती 19 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में रैली करेंगी। मैनपुरी से समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव उम्मीदवार हैं। 1993 के बाद ऐसा पहली बार होगा जब मायावती मुलायम सिंह यादव के लिए प्रचार करेंगी। एसपी-बीएसपी के गठबंधन के बाद कई बार मुलायम सिंह यादव इसकी आलोचना करते रहे हैं।

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