मॉडिफाई की गई गाडिय़ों का नहीं हो सकता रजिस्ट्रेशन : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। अगर आप भी पुरानी गाडिय़ों को मॉडिफाई करवाकर नया लुक देेकर चलाते हैं तो सतर्क हो जाएं। मॉडिफाई गाडिय़ों को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस विनीत सरन की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के एक फैसले को पलट दिया। साथ ही फैसला दिया कि रजिस्ट्रेशन कराए जाने वाले वाहन का निर्माता कम्पनी द्वारा दिए गए ऑरिजनल स्पेसिफिकेशन्स को पूरा करना जरूरी है जैसा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 (1) के तहत अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि कार या अन्य वाहन पर पेंटिंग या फिटमेंट में मामूली बदलाव की वजह से कोई गाड़ी रजिस्टेशन के लिए अयोग्य नहीं होगी लेकिन अगर गाड़ी की बॉडी या चेसिस के स्ट्रक्चर में कोई बदलाव हुआ है तो उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि किसी वाहन के केवल प्रोटोटाइप (मूलरूप) की सडक़-योग्यता और सुरक्षा सुविधाओं के लिए टेस्टिंग की जाती है। इस वजह से कोई भी वाहन जो ऑरिजनल मैन्युफैक्चरर स्पेसिफिकेशन्स से मेल नहीं खाता है उसके रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसके अलावा अदालत ने कहा कि यदि पुराने वाहन के इंजन को उसी कम्पनी और उतनी ही क्षमता के नए इंजन से बदलना है तो इसके लिए भी पहले रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी से अनुमति लेनी होगी। ऐसा नहीं करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द भी हो सकता है। हालांकि कोर्ट ने यह साफ किया कि सीएनजी किट के साथ कारों की रेट्रोफिटमेंट को कानून के तहत केंद्र सरकार द्वारा अनुमति दी गई है इसलिए यह संरचनात्मक परिवर्तन (स्ट्रक्चरल चेंज) के रूप में नहीं गिना जाएगा।

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