मां आतुल्य आनंद व मातृत्व का स्त्रोत : साध्वी मनजीत

जालन्धर, (मैट्रो सेवा)। संस्थान की और से जालंधर कैट में माँ भगवती जागरण का एक भव्य आयोजन करवाया गया जिसमें सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी मनजीत भारती जी ने बताया के जागरण का भावर्थ है। आंतरिक जागरण अथवा आत्मा का जागरण, जब माँ भगवती के ज्योति स्वरूप का घट में प्रक्टय होता है । तो आंतरिक जगत में ज्ञान की अग्नि विकारों का नाश कर देती है । साध्वी जी ने माँ के 9 रूपों के बारे में बताते हुए कहा के यूँ तो विश्व में अनेकों रूपो में शक्ति की उपासना की जाती है। लेकिन भारत ही केवल ऐसा देश है,जहाँ शक्ति को माँ कह कर पुकारा जाता है। माँ ,जो अतुल्य आनंद एवं मातृत्व का स्त्रोत है जो सदा अक्षुण्ण अबाध रूप में बहता है। माँ का एक और रूप है जो में सदचरित्र की प्रेरणा देता है। जिसके पास चारित्रक श्रेष्ठता नही वह दुर्गति को प्राप्त होता है। यह श्रेष्ठता हमें केवल ब्रह्मज्ञान द्वारा ही प्राप्त होती है। जैसे के माँ के इस नाम से ही दृष्श्यमान है कि ‘ब्रह्मचारिणी’ जो ब्रह्म में रहकर आचरण करती है। माँ का ये नाम हमें यही प्रेरणा दे रहा है कि ब्रह्म में रहकर आचरण करो मन के वस होकर नही। जब एक तत्ववेता गुरू हमें दिव्य चक्षु प्रदान कर उस प्रकाश रूप परम सता को हमारे भीतर दिखा सकता है तब हम उस परम शक्ति से जुड कर ही ब्रह्म आचरण का र्निवाह कर सकते है। और एक रूप महिषासुर म्रदिनी का भी है। जब धरती महिष आदि असुरों से आक्रांत थी । इनकें दानवी कुकृत्यो से चहुँ और त्राहि-त्राहि व हाहाकार मचा हुआ था। ऐसे में सभी देवगन एकत्र हुए और उस परम शक्ति दुर्गा का आह्वान किया माँ विकराल रोद्र रूप लेकर प्रकट हुई और इन दैत्यों का विनाश कर धरा को शीतल किया।

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