पराई स्त्री को पाने के लिए दीवाली की रात दी उल्लू की बलि मगर मर गया पिता

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। पराई स्त्री को पाने की चाह में एक शादीशुदा शख्स ने दिवाली की रात उल्लू की बलि दी। उसे लगा कि इससे एक स्त्री वश में हो जाएगी, पर अगले ही दिन उसके पिता गुजर गए। लेकिन शख्स नहीं माना और रोज रात को उल्लू से जुड़ी तंत्र क्रिया करता रहा। आधी रात को शक में डालने वाली इस चहल-पहल से पड़ोसी भी डरे तो उनमें से किसी ने शिकायत कर दी। जानकारी ऐनिमल वेलफेयर बोर्ड से होते हुए स्थानीय पुलिस तक पहुंची। रविवार को पुलिस ने घर में कूलर के अंदर से मरे हुए उल्लू को बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कन्हैया लाल ने पुलिस को बताया कि उल्लू की बलि देने के बाद उसके पैर को काट दिए थे। पूछताछ में बताया कि वह एक महिला से प्यार करता है और उसे वश में करने के लिए तंत्र-मंत्र कर रहा था। उसने 15 दिन पहले अपने जीजा से मंगवाया था। जांच में पता चला कि कन्हैया इलाके में काफी दिन से तंत्र-मंत्र करता है और आसपास की महिलाएं उससे अपनी समस्या का समाधान करवाने आती हैं। 

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी सुल्तानपुरी के सी ब्लॉक का 40 वर्षीय कन्हैया है। वह पेशे से ड्राइवर है। घर में पत्नी के अलावा तीन बच्चे भी हैं। कन्नू नाम के उसके जीजा ने उसे दिवाली की रात उल्लू के जरिए तंत्र क्रिया से स्त्री को वश में करने और धन वैभव मिलने की बात कही थी। कन्नू ही उस उल्लू को लाया था। उसने कन्हैया को बताया था कि जिसे वश में करना हो, उस महिला के बाल से उल्लू के पंख को मिलाकर रोज पूजा की जाए तो यह मुमकिन है।
‘तंत्र-मंत्र और मनगंढ़त बातों की वजह से उल्लुओं को लगभग पूरे साल ही खतरे में डाला जाता है। दिवाली के सीजन में इनकी डिमांड इतनी बढ़ जाती है कि एक उल्लू को 35 हजार रुपये तक में बेचा जाता है।’ यह कहना है एनिमल राइट्स के लिए काम करने वाले ऐक्टिविस्ट्स का। उन्होंने बताया कि वाइल्डलाइफ प्रटेक्शन ऐक्ट के तहत उल्लू को संरक्षित पक्षियों की लिस्ट में रखा गया है। उन्हें पकड़ने, कैद कर रखने, बेचने-खरीदने या किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचाने में 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। इसके बावजूद बहुत बड़े लेवल पर उल्लुओं की स्मगलिंग की जाती है। इनके नाखुनों और बालों के लिए भी उल्लुओं का शिकार होता है।
पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ ऐनिमल्स (पीटा) के असोसिएट डायरेक्टर निकुंज शर्मा ने बताया कि तंत्र-मंत्र के नाम पर उल्लुओं की स्मगलिंग बहुत बड़े लेवल पर होती है। एनसीआर से भी कई उल्लू पकड़े जाते हैं और अवैध रूप से बेचे जाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार से भी उल्लुओं की सप्लाइ की जाती है। कई ऐसे में केस देखे गए हैं, जिनमें 2 लीटर की प्लास्टिक की बोतलों में डालकर उल्लुओं की स्मगलिंग की जाती है। बोतल को ऊपर से काटकर इनमें उल्लू भरे जाते हैं और बाहर कपड़ा लपेट दिया जाता है। पीटा के सीईओ डॉ मणिलाल वलियाटे ने बताया कि बहुत कम केसों में ही गुनहगार पकड़े जाते हैं। उल्लुओं को बचाने के लिए कई कैंपेन भी चलाए जा रहे हैं।
ह्यूमन सोसायटी इंटरनैशनल की डेप्युटी डायरेक्टर आलोकपर्णा सेनगुप्ता ने बताया कि उल्लुओं को पकड़ना या मारना पूरी तरह से गैर कानूनी है। इनकी स्मगलिंग में दिल्ली का देश में तीसरा नंबर है। इसके खिलाफ एचएसआई ने एक कैंपेन भी चलाया था। इसके तहत पिछले कुछ महीनों में 36 उल्लुओं को बचाया गया है। ऐक्टिविस्ट्स का कहना है कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने के पीछे भी स्मगलिंग करने वाले लोग ही हैं। वे अपना मार्केट बचाने के लिए इस तरह की बातों को हवा देते हैं। उनका कहना है कि पर्यावरण के लिए जरूरी है कि उल्लुओं को बचाया जाए।

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