पोप पर पाखंड के आरोप लगे

700 साल के इतिहास में पहली बार कैथोलिक धर्मशास्त्रियों ने किया दोषारोपण

न्यूयॉर्क, (मैट्रो नेटवर्क)। कैथोलिक धर्मशास्त्रियों ने इस संबंध में पिछले महीने पोप फ्रांसिस को 25 पेज की एक चिट्ठी भेजी है जिसमें उन पर लगे आरोपों का जिक्र किया गया है। शनिवार को ये चिट्ठी अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को मिली, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ। इस चिट्ठी पर 62 कैथोलिक धर्मशास्त्रियों ने हस्ताक्षर किए हैं। कैथोलिक धर्मशास्त्रियों का कहना है कि कैथोलिक समुदाय के 700 साल के इतिहास में ये पहला मौका है, जब किसी पोप पर विधर्म के आरोप लगे हों। कैथोलिक धर्मशास्त्रियों ने चिट्ठी में पोप पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने 2016 के दस्तावेज ‘द जॉय ऑफ लव’ और ‘एक्ट्स, वड्र्स एंड ओमिसन्स’ में कैथोलिक समुदाय के संस्कारों जैसे शादी, नैतिक जीवन आदि को लेकर दुष्प्रचार किया। कैथोलिक धर्मशास्त्रियों, पादरियों और शिक्षाविदों ने पोप फ्रांसिस को आरोपों को लेकर कुछ सवाल भी पूछे हैं। हालांकि, इन आरोपों का पोप फ्रांसिस ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। वेटिकन सिटी के प्रवक्ता ने भी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में नैतिक दर्शन पर शोध कर रहे जोसेफ शॉ ने कहा कि धर्मशास्त्रियों की जिम्मेदारी होती है कि वो लोगों को चर्च की शिक्षा के बारे में उन्हें बताएं। उनके पूर्वाग्रहों और गलतफहमियों को दूर करें। लेकिन पोप फ्रांसिस के ‘द जॉय ऑफ लव’ से समाज में विवाद खड़ा हो गया है। कैथोलिक धर्म या रोमन कैथोलिक धर्म ईसाई धर्म की एक मुख्य शाखा है, जिसके अनुयायी रोम के वेटिकन नगर में स्थित पोप को अपना धर्माध्यक्ष मानते हैं। बता दें कि ईसाई धर्म की दूसरी मुख्य शाखा प्रोटेस्टैंट कहलाती है और उसके अनुयायी पोप के धार्मिक नेतृत्व को नहीं स्वीकारते। कैथोलिकों और प्रोटेस्टैंटों की धार्मिक मान्यताओं में और भी बड़े अंतर हैं।

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