पीटीयू मामला : विजीलेंस की तमाम दलीलें नेस्तनाबूद

अदालत ने 25 जनवरी तक रजनीश अरोड़ा को न्यायिक हिरासत में भेजा, नहीं दिया पुलिस रिमांड

कपूरथला/जालन्धर, (साहिल गुप्ता/मैट्रो ब्यूरो)। इंद्र कुमार गुजराल पंजाब तकनीकी यूनिवर्सिटी (पीटीयू) के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. रजनीश अरोड़ा को आज यहां की एक अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
गौरतलब है कि डा. अरोड़ा को उनके सहित 9 अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज किए गए एक मामले के तहत विजीलेंस पुलिस ने सोमवार की सुबह अमृतसर स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के लिए अदालत ने उनका चार दिन का रिमांड दिया था। आज विजीलैंस पुलिस ने पुन: रिमांड लेने के लिए दुनियाभर की दलीलें माननीय अदालत के समक्ष रखीं लेकिन अदालत ने एक भी दलील न मानते हुए डा. अरोड़ा को 25 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। अब बचाव पक्ष डा. अरोड़ा की जमानत के लिए ऊपरी अदालत में जाएगा। गौरतलब हगै कि डा. रजनीश अरोड़ा शिक्षा और सेवा क्षेत्र में अपने अभूतपूर्व त्याग और योगदान की वजह से अत्यंत लोकप्रिय हैं और उनकी गिरफ्तारी के बाद चौतरफा यह प्रतिक्रिया आई थी कि ऐसे व्यक्ति पर लगाए जा रहे आरोप निराधार और झूठे हैं। उधर यह भी सामने आया है कि इस सारे मामले के पीछे पीटीयू में व्याप्त रहा शिक्षा माफिया है जिसे डा. रजनीश अरोड़ा ने अपने कार्यकाल के दौरान नत्थ डाली थी। डा. अरोड़ा के दो कार्यकाल पूरा होने के बाद यह माफिया यूनिवर्सिटी को पुन: अपने कब्जे में लेने के लिए ऐसे खेल खेल रहा है। डा.अरोड़ा का पूरा जीवन मेधावी छात्र से लेकर कुशल प्रशासक, समर्पित सेवा कार्यकर्ता और अपने दायित्व के प्रति सदैव सजग रहने वाले व्यक्ति के रूप में बीता है। इस मामले में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद भी डा. अरोड़ा के चेहरे पर इसी आत्मविश्वास की झलक दिखाई दी थी। बताया जा रहा है कि डा. अरोड़ा ने जब पीटीयू का कार्यभार संभाला था तो इसे एक भ्रष्टाचारी संस्थान के रूप में जाना जाता था लेकिन डा. अरोड़ा ने व्यापक वांछित बदलावों करते हुए न केवल भ्रष्टाचार पर कमान कसी अपितु यूनिवर्सिटी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की बनाकर वैश्विक पहचान और मान्यता दिलाई। डा. अरोड़ा पर इस प्रकार के निराधार दोषारोपणों के बाद शिक्षा माफिया के विरुद्ध लोग लामबंद होने लगे हैं और आने वाले दिनों में ऐसी संभावना की जा रही है कि पीटीयू में बैठे इस माफिया के सूत्रों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर रोष प्रदर्शन या घेराव हो सकते हैं। डा. अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद चौतरफा आश्चर्यजनक प्रतिक्रियाएं आईं थी कि एक ऐसा व्यक्ति जिसने 50 वर्ष तक निरंतर अपना जीवन समाज के लिए ईमानदारी से दिया उसके विरुद्ध ऐसा षड्यंत्र रचने वाले कौन हैं।

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