ई-वे बिल से निजात के लिए पंजाब के व्यापारी पालने लगे घोड़े

जालन्धर, (मैटो नेटवर्क)। जीएसटी व्यवस्था में ई-वे-बिल के मामले में पंजाब के व्यापारी सरकार के साथ अब तू, डाल-डाल, मै, पात-पात की कहावत को चरितार्थ करने उतर आए है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार के फैसले के बाद पंजाब सरकार ने भी राज्य के अंदर बिक्री के लिए ई-वे-बिल की व्यवस्था अनिवार्य कर दी है। इससे निपटने के लिए व्यापारियों ने एक्ट में तकनीकी कमी को पकड़ते हुए सरकार से निपटने को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि ई-वे-बिल संबंधी एक्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि अगर कोई वस्तु गैर मोटर वाहन से ले जाई जा रही है तो ईवे बिल की जरूरत नहीं है। यही नियम व्यापारियों के लिए ब्रह्मास्त्रसाबित हो रहा है।ईवे बिल से बचने के लिएव्यापारियों ने गैर मोटर वाहनों पर माल भेजना शुरू कर दिया है।
ये गैर मोटर वाहन तांगाऔर रेहड़ा आदि हैं।जालंधर, लुधियाना के कुछव्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जहां उन्हें अपना टेंपोया अन्य मालवाहक वाहन खरीदना पड़ता था वहीं अब वे घोड़े पालना शुरू कर रहे हैं। इससे उन्हें माल की सप्लाई में ईवे बिल से छुटकारा मिलेगा। वहीं रेहड़ाचालकों व तांगा चलाने वाले लोगों का कहना है कि कुछ दिनों से उनके रोजगार में वृद्धि हुई है। पंजाब में घोड़ों के प्रजनन से जुड़े एक कारोबारी ने बताया कि हाल ही में उसे लुधियाना के एक बड़े व्यापारी ने बुलाया था। जब वह मिलने पहुंचा तो व्यापारी ने उससे 12 घोड़े (तांगा)ठेके पर लेने की बात कही। दिहाड़ी तय होने पर व्यापारी ने घोड़े किराये पर ले भी लिए। घोड़ों के कारोबारी ने बताया कि पहले तो उसे बात समझ में नहीं आई लेकिन अब उसे मालूम हो गया कि एकाएक घोड़ों की डिमांड क्यों बढ़ गईहै।उधर, तांगों पर माल जाने से टेंपो चालकों की कमाई पर भी असर पडऩे लगा है। उल्लेखनीय है कि इंटरस्टेट ईवे बिल पंजाब में 1 जून से लागू हो चुका है और माल को ढोने पर व्यापारियों को ईवे बिल भरना पड़ रहा है। बेशक सरकार ने टैक्स चोरी पर नकेल के लिए जीएसटी और ईवे बिल का फंडा अपनाया लेकिनइन फंडों ने व्यापारियों को कागजी औपचारिकताओं के फेर में डाल दिया।

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