एस.सी. कमिशन में अपने अनुभवों पर राजेश बाघा ने किताब लिखी

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (एस.सी. कमिशन) के पूर्व चेयरमैन राजेश बाघा ने कमिशन में अपने 6 वर्ष के कार्यकाल के अपने अनुभवों को एक पुस्तक के माध्यम से सांझा किया है। ‘एस.सी. कमिशन च मेरे 6 साल’ शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक में राजेश बाघा ने पंजाब में तेजी से बदल रहे सामाजिक, सियासी और आर्थिक परिदृश्य में सबसे अधिक बल दलित समाज पर केन्द्रित किए जाने के कई कारणों पर बाघा ने रौशनी डाली है। इसके पीछे बहुत से कारणों को बताते हुए उन्होंने कहा है कि राजनीतिक पार्टियां, धर्म या डेरे तथा शिक्षा संस्था तक दलित भाईचारे पर खास ध्यान केन्द्रित किए हुए है। बाघा ने अपने अनुभवों और पंजाब भर के प्रवास के आधार पर प्राप्त जानकारी सांझा करते हुए कहा है कि इसका सबसे बड़ा कारण दलितों का जनसंख्या में सर्वाधिक अनुपात इनका बढ़ता शिक्षा ग्राफ, औरतों की भागेदारी और नौजवान पीढ़ी का सचेत हो जाना है। बाघा ने इस पुस्तक में अपने अनुभव के आधार पर कहा है कि इस अब इस समाज को भ्रम में रखना मुश्किल है। इस पुस्तक में बाघा ने एस.सी. कमिशन के उनके कार्यकाल में हुए महत्त्वपूर्ण फैसलों, मीटिंगों के जरिए हुए सार्थक यत्नों, कमिशन ने उनके द्वारा किए गए कार्यों का लेखा-जोखा बताती खबरों, डा. बी.आर. अम्बेदकर की 125वीं जयंती के संदर्भ में उनकी टोली द्वारा करवाए गए 6 महत्त्वपूर्ण सैमीनारों तथा सामाजिक, आर्थिक पाटों में पिसते पंजाब के दलित की हालत सहित अपने सियासी सफर में अपने शिक्षार्थी होने के अर्थ को सांझा किया है। जालन्धर के दीपक पब्लिशर द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के लेखन में राजेश बाघा का मार्गदर्शन और सहयोग उनके लेखक मित्र देसराज काली ने किया है। राजेश बाघा ने उनके सियासी सफर में उन्हें सदैव प्रोत्साहित करने वाले अपने बड़े भाई तिलक राज भलवान को यह पुस्तक समर्पित की है। यह पुस्तक शीघ्र ही एक बौद्धिक समारोह के जरिये लोकार्पित की जाएगी।

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