प्रभु की प्रकट-अप्रकट लीलाओं को कथा प्रसंगों के माध्यम से बताया

जालन्धर, (मैट्रो सेवा)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान मस्त राम पार्क, माई हीरा गेट में भागवत कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से परम पूजनीय सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या महामनस्विनी साध्वी सुश्री भाग्यश्री भारती जी ने कंस वद और भगवान की प्रकट और अप्रकट लीलाओं में छिपे हुए आध्यात्मिक रहस्यों को कथा प्रसंगों के माध्यम से उजागर किया। आज छठे दिवस में साध्वी जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण के जीवन की दिव्य लीलाएँ भी प्रत्येक मनुष्य के लिए अध्यात्म का मार्ग ही इंगित करती है। कृष्णतत्व से परिचित न होने के कारण ही संकुचित दृष्टिकोण वाले लोग प्रभु की बाल लीलाओं पर भी अशलीलता व संशय का कीचड़ उछाल देते है। साध्वी जी ने भगवान का मथुरा गमन प्रसंग प्रस्तुत किया व कंस वध का सजीव चित्रण करते हुए उन्होंने बताया कि जब भी प्रभु का अवतरण इस धरा पर हुआ तो उनहोंने सत्य स्थापना व अधर्म को विनष्ट करने के लिए लीलाएँ की। वेणुगीत प्रसंग के माध्यम से साध्वी जी ने बताया कि गोपियाँ आत्मतत्व का प्रतीक है व कान्हा के अधरों पर सजी विश्व मोहिनी बांसुरी- पूर्ण समपर्ण का। बांसुरी एक सूखा खोखला बांस का टुकड़ा है जिसका अपना कुछ नहीं न आवाज न सुर। यह प्रभु के हाथ का यंत्र है। जिस क्षण एक भक्त मैं का तयाग कर प्रभु के हाथ का यंत्र हो जाता है उसी क्षण एक गोपिका तत्व उसमें समा जाती हैं। प्रभु श्री कृष्ण के मथुरागमन पर गोपियों की मार्मिक दशा के भावपूर्ण वर्णन से सभी के नेत्र सजल हो उठे। साध्वी सुश्री भगवती भारती ,सतिंंदर भारती ,हरिता भारती, त्रिपुंड धारणी भारती ,सोनिया भारती ,स्वामी कुलवीरा नंद जी, ने मधुर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भाावविभोर कर दिया। कथा के दौरान श्री योगराज जलौटा रोहित जोशी, मनदीप सिंह, प्रिंस बग्गा,हितेश सेठी के साथ श्री राधा कृष्ण भागवत परिवार के सदस्यों और स्वामी सदा नंद जी सज्जनानंद जी ने दीप प्रजवलन की रसम को अदा किया।

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