सतलोक आश्रम के संत रामपाल हत्या के दोनों मामलों में दोषी करार

हिसार, (मैट्रो नेटवर्क)। हिसार के सतलोक आश्रम के संत रामपाल पर सेशन कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। रामपाल दोनों मामलों में दोषी करार दिए गए। इन मामलों में 16-17 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी। रामपाल पर 24 अगस्त को फैसला आना था लेकिन राम रहीम के मामले को देखते हुए सुरक्षा कारणों से इसे टाल दिया गया था और अब आज (11 अक्टूबर) इस पर फैसला सुनाया गया। वहीं रामपाल पर देशद्रोह के मामले में 19 नवम्बर को सुनवाई होगी।
एफआईआर नंबर 429 के मुताबकि नवम्बर 2014 में बरवाला के सतलोक आश्रम में रामपाल के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प के दौरान रामपाल और उसके 15 समर्थकों पर चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या करने का आरोप है। एफआईआर नंबर 430 के मुताबिक रामपाल और उसके 13 समर्थकों पर नवंबर 2014 में बरवाला के सतलोक आश्रम में रामपाल के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प के दौरान आश्रम के भीतर एक महिला की हत्या का आरोप है।
फैसले के बाद रामपाल के समर्थकों द्वारा उपद्रव होने की आशंका के चलते जेल के ही अंदर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रामपाल की पेशी हुई। इस फैसले को देखते हुए वीरवार सुबह से ही पूरे हिसार में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। बुधवार को ही जिले में धारा-144 लगा दी गई थी। साथ ही यहां की सभी सीमाएं सील कर दी गई थीं। करीब 2000 सुरक्षा बलों की नियुक्ति की गई। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और रामपाल के समर्थकों की भीड़ का हिसार शहर में प्रवेश रोकने के लिए 48 पुलिस नाके लगाए गए थे। शहर में कई जगह रूट डायवर्जन भी हुआ।
आपको बता दें कि 18 नवंबर 2014 को सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को बरवाला स्थित उसके आश्रम से बाहर निकालने के लिए पुलिस ने अभियान चलाया था। कार्रवाई के पहले दिन काफी लोग घायल हुए लेकिन रामपाल के समर्थक डटे रहे। रामपाल के बाहर निकलने तक काफी हिंसा हुई और इस दौरान पांच महिलाओं समेत एक बच्चे की मौत हुई थी। पुलिस ने हिंसा के एक मामले में रामपाल के अलावा 15 लोगों पर और एक अन्य मामले में रामपाल समेत 14 लोगों पर केस दर्ज किया था।
प्रशासन ने फैसले को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण में हत्या के दो मुकदमों की सुनवाई अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अजय पराशर सेंट्रल जेल वन में कर रहे थे। उनका पिछले दिनों यहां से तबादला हो गया था जिसके बाद रामपाल के प्रमुख तीन मुकदमे अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश डी.आर. चालिया की अदालत में स्थानांतरित हो गए थे। सुनवाई के दौरान 10 से 20 हजार श्रद्धालुओं के कोर्ट परिसर, सेंट्रल जेल, लघु सचिवायल, टाउन पार्क और रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर एकत्रित होने की आशंका थी। ऐसे में ये समर्थक किसी तरह की कानून व्यवस्था न बिगाड़ पाएं, इसके लिए तैयारियां की गई थीं। जिले से 1300 पुलिसकर्मी और बाहरी जिलों से 700 जवानों की ड्यूटी लगाई गई। अन्य जिलों के एसपी और डीएसपी की ड्यूटी भी हिसार में लगाई गई है। इनके अलावा आरएएफ की पांच कंपनियों को हिसार बुलाया गया है।

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