स्कूलों को एससीईआरटी का निर्देश-पढ़ाई का पुराना तरीका कहीं बेहतर

चंडीगढ़, (मैट्रो ब्यूरो)। आधुनिक शिक्षाविदों ने भी अब मान लिया है कि कई साल पहले से स्कूलों में बच्चों को गणित के पहाड़े रटाने का तरीका काफी बेहतर था। उससे बच्चों की स्किल्स बेहतर होती थीं। इसके बाद स्टेट काऊंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने बच्चों को फिर पहाड़े रटा कर याद करवाने के निर्देश दिए हैं। एससीईआरटी के डायरेक्टर इंटरजीत ङ्क्षसह की ओर से इस संबंध में पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों को पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि गणित में परिपक्वता लाने और गणित सीखने के लिए पहाड़े याद होने जरूरी हैं। अगर बच्चों को पहाड़े मुंह जुबानी याद हैं तो उनकी कंप्यूटेशनल स्किल्स बेहतर होती हैं, गणित सीखने के प्रति उत्साह बढ़ता है।

कम हो गई है बच्चों की रिटेंशन पावर

एससीईआरटी के डायरेक्टर इंदरजीत सिंह ने कहा कि कैलकुलैटर आदि आने के बाद से बच्चों की रिटेंशन पावर और सोचने-समझने की क्षमता कम हो गई है। गुणा-भाग के लिए दिमाग के बजाये गैजेट्स का सहारा लेने से उनकी दिमागी क्षमता विकसित नहीं हो रही। पहले आखिरी पीरियड में पहाड़े अनिवार्य होते थे। लेकिन पिछले 15-20 वर्षों में यह प्रचलन धीरे-धीरे खत्म हो गया। इसका बुरा प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। हालांकि सरकारी स्कूलों में ही ऐसे बच्चे भी हैं जो तीन हजार तक के पहाड़े सुना सकते हैं।

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