सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य के दाता हैं श्री गणेश

गणेशोत्सव हिंदू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख उत्सव है। यह उत्सव भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी तिथि तक मनाया जाता है। यद्यपि गणेशोत्सव पूरे भारत में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, किंतु महाराष्ट्र में इसका विशेष महत्त्व है। गणेशोत्सव में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का विशेष महत्त्व है। यह भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख तिथियों में से एक गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी (अनंत चौदस) तक चलने वाला दस दिवसीय महोत्सव है। यह माना जाता है कि इन दस दिनों के दौरान यदि श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाए तो जीवन की समस्त बाधाओं का अंत कर विघ्नहर्ता अपने भक्तों पर सौभाग्य, समृद्धि एवं सुखों की बारिश करते हैं। एक लोककथा के अनुसार एक बार देवी पार्वती स्नान करने के लिए भोगावती नदी गई। उन्होंने अपने तन के मैल से एक जीवंत मूर्ति बनाई और उसका नाम गणेश रखा। पार्वती ने उससे कहा- ‘हे पुत्र! तुम द्वार पर बैठ जाओ और किसी पुरुष को अंदर मत आने देना।’ कुछ देर बाद भगवान शिव वहां आए। द्वार पर पहरा दे रहे गणेश ने उन्हें देखा तो रोक दिया। इसे शिव ने अपना अपमान समझा। क्रोधित होकर उन्होंने गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया और भीतर चले गए। महादेव को नाराज देखकर पार्वती ने समझा कि भोजन में विलंब के कारण शायद वे नाराज हैं। उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया। तब दूसरी थाली देखकर शिवजी ने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि दूसरी थाली किसके लिए है? पार्वती बोलीं, दूसरी थाली मेरे पुत्र गणेश के लिए है, जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है। क्या आपने आते वक्त उसे नहीं देखा? यह बात सुनकर शिव बहुत हैरान हुए। उन्होंने कहा, देखा तो था मैंने, लेकिन उसने मेरा रास्ता रोका था। इस कारण मैंने उसे उद्दंड बालक समझकर उसका सिर काट दिया। यह सुनकर पार्वती विलाप करने लगीं। तब पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार पार्वती पुत्र गणेश को पाकर प्रसन्न हो गईं। उन्होंने पति तथा पुत्र को भोजन परोस कर स्वयं भोजन किया। यह घटना भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर घटित हुई थी, इसलिए यह तिथि पुण्य पर्व के रूप में मनाई जाती है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *