शूगर का डायबिटीज से कोई कनैक्शन नहीं

चिकित्सा जगत में बढ़ी साजिश का पर्दाफाश

जालन्धर, (विशेष संवाददाता)। ब्लड शूगर बीमारी की सौ साल पुरानी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। यह अद्भुत कार्य अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डा. बिसवरूप राय चौधरी ने अपनी दस साल की रिसर्च के बल पर कर दिखाया है। हालांकि इस कार्य के लिए उन्हें अलायंस यूनिवर्सिटी लसाका से प्राप्त अनुसंधान आधारित ड़ाक्टरेट की डिग्री छीन लिए जाने की धमकी तक मिली थी लेकिन 12 नवम्बर 2017 को दिल्ली के सिटीफोर्ट सभागार में सैंकड़ों व्यक्तियों के सामने उन्होने बाजार आधारित इस चिकित्सीय साजिश को बेनकाब करते हुए करोड़ों डायबिटीज पीडि़त मरीजों के लिए डायबिटीज होने का मार्ग दिखाया है।
डायबिटीक व्यक्तियों के लिए अक्सर शूगर के सेवन की आम चिकित्सक सख्त मनाही करते हैं लेकिन डा. बिसवरूप का दावा है कि भारी मात्रा में शूगर आधारित फलों जैसे आम, अंगूर, केला, सेब इत्यादि का सेवन करके मात्र कुछ महीनों में ही डायबिटीज नामक बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। अपने इस दावे को डा. राय ने सिटी फोर्ट सभागार में सार्वजनिक रूप से लाइव प्रयोग के जरिए साबित किया। इस कार्यक्रम का उनका वीडियो यू टयूब पर उनके चैनल Dr. Biswaroop Roy Chowdhry पर ‘ब्लड शूगर लाईव एक्सपेरीमेंट टू क्योर डायबिटीज’ के शीर्षक से देखा जा सकता है। चिकित्सा क्षेत्र में एक सनसनी के रूप में सामने आए उनके इस प्रयोग से जुड़ा उनका रिसर्च पेपर गूगल सर्च इंजन पर भी उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो को इसकी लाचिंग के 24 घंटे के भीतर ही लाखों लोगों ने देखा है और अब यह गिनती करोड़ों के आंकड़े को छू रही है। डा. चौधरी का दावा है कि उन्होने अपने दस साल के अनुसंधान में बीस हजार से अधिक डायबिटीज मरीजों के खून की जांच की है लेकिन इसमें शूगर नाम का कोई तत्व नहीं है। बकौल डा. चौधरी दरअसल 100 साल से रची जा रही इस साजिश के तहत ग्लूकोज आधारित डायबिटीज बीमारी को भारत और एशिया के कुछ अन्य देशों में विशेष रूप से ब्लड शूगर के नाम पर प्रचारित किया गया। जबकि डायबिटीज से शूगर का कोई संबंध ही नहीं। इसकी वजह यह है कि दुनिया में डायबिटीक कंट्रोल के लिए इंसूलिन नामक दवा बनाने वाली तीन विदेशी कंपनियों का दुनिया की 99 प्रतिशत मार्किट पर कब्जा है और वह प्रतिवर्ष इस साजिश के तहत शूगर की दवा के नाम पर 10 बिलियन डालर का कारोबार कर रही है। डा. चौधरी के अनुसार डायबिटीज की बीमारी में फलों इत्यादि के सेवन से रोक की वजह यह है कि इससे डायबिटीज रोगियों में शूगर की मात्रा कम होती है और यदि डायबिटीज पेशेंट फल खायेंगे तो इन कम्पनियों का धंधा चौपट होगा और गरीब देश अमीर हो जायेगा। डा. बिसवरूप बताते हैं कि फलों से प्राप्त शूगर कांटेंट को फ्रूटकोज कहते हैं और इनके सेवन से शरीर में ग्लूकोस की मात्रा कम होती है। उन्होने अपने वीडियो में यह प्रयोग भी करके दिखाया है। इसमें उन्होने अपने ब्लड सेंपल में पहले ग्लूकोज को मिश्रित किया तो उनके खून में ग्लूकोज की मात्रा 160 से बढक़र 500 तक चली गई जबकि उन्हीं के इस ब्लड सेंपल में समानांतर रूप से फ्रूटकोज मिश्रित की गई तो ग्लूकोज की मात्रा 160 की बजाय 109 हो गई। हालांकि डा. चौधरी मिठास का स्वाद प्राप्त तत्वों में ग्लूकोस, फ्रूटकोज और स्क्रीन में से स्क्रीन को सर्वाधिक घातक बताते हैं और इसे कैंसर जनित बताते हं। स्क्रीन की मिठास, फ्रूटकोज से तीन गुणा अधिक है जबकि फ्रोटकोज, ग्लूकोस से दोगुनी मीठी है। डा. चौधरी बताते हैं कि फ्रूटकोज और स्क्रीन शरीर में सीधे खून में मिश्रित नहीं होती और यह लिवर में जाती है। इसलिए शूगर का डायबिटीज बीमारी से जुड़े होने का कोई मतलब नहीं है। यही वदह है कि शूगर जांचने वाले उपकरण का नाम शूगर मीटर न होकर ग्लूकोनो मीटर है। डायबिटीज से मुक्ति पाने की इच्छा वाले रोग उक्त प्रयोग को इंटरनेट के जरिए यू टयूब पर डा. राय के चैनल पर देख सकते हैं।

बकौल डाक्टर बिस्वरूप…..

1. सभी टूथपेस्ट में स्क्रीन का आंशिक मिश्रण होता है। यह मिठास में शूगर से तीन सौ गुणा अधिक मीठी है लेकिन यह डायबिटीज का कारण नहीं बनती। हालांकि इसे कैंसर जनित पाया गया है।
2. डाईट कोक में फ्रूटकोज का इस्तेमाल होता है इसलिए डाईट कोक पीने से ग्लूकोज की मात्रा नहीं बढ़ती
3. क्लूकोन मीटर रीडिंग भी यह तय नहीं करती कि ग्लूकोज की जो मात्रा पाई गई है उससे
यह घोषित किया जा सके कि संबंधित व्यक्ति डायबिटीक है। कई बार तय से अधिक मात्रा मीटर पर आने के बावजूद व्यक्ति एक्टिव रहता है। इसलिए डायबिटीज की पुष्ट जानकारी के लिए विस्तृत टैस्ट वांछनीय है।
4. डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण ग्लूकोज है। इसलिए ग्लूकोज को नियंत्रण में रखने को फ्रूटकोज अन्य कारागर तत्व कहे जा सकते हैं।
5. डायबिटीज की दवा केवल फूड इंडैक्स के अनुसार अपनी डाईट लेना है। इमें फल, शाक और स्प्राऊटस इत्यादि सम्मिलित है।

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