परेशानी और तनाव का कारण हैं असीमित इच्छाएं : साध्वी ओम भारती जी

जालन्धर, (मैट्रो नेटवर्क)। इंसान इलेक्ट्रिक मस्तिष्क को बहुत महत्व देने लग गया है। मानव मस्तिष्क से भी ज्यादा और अपनी असीमित इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपने दिमाग को भी इलेक्ट्रिेनिक दिमाग बना लिया है जो कि मानव परेशानी और तनाव का कारण बन चुका है। यह विचार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा एपीजे कालज में करवाये गये लैक्चर में साध्वी ओम भारती जी ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहाकि आजकल बहुत सी मनोवैज्ञानिक चिकित्साओं की पद्धतियां बन चुकी हैं लेकिन इतनी चिकित्सा पद्धतियां होने के बाद भी निराशा और तनाव इतना बढ़ चुका है कि आंकडों के अनुसार भारत में तनाव से ग्रसित मरीज सबसे ज्यादा हैं। तनाव से ग्रसित 89 प्रतिशत मरीज भारत में पाए जाते हैं। इसी तरह कुरुक्षेत्र में अर्जुन भी भारी डिप्रेशन का शिकार हुआ था और उसमें बेचैनी, निष्क्रियता, थकान, पसीना, कंपन आदि लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगे थे। साध्वी ओम भारती जी ने कहाकि आज की मनौविज्ञानिक पद्धतियां वैचारिक और व्यवहारिक बदलाव तो करती हैं परन्तु इलाज नहीं करतीं ताकि यह चिंता खत्म हो जाए। यही कारण है कि जाना माना मनोवैज्ञानिक फ्रायड उनके ऊपर निर्भर रहे 18 मनोरोगियों का इलाज नहीं कर पाया था। यहां तक कि स्वयं को भी सिगार की लत अर्थात नशे की लत के मनोरोग से मुक्त नहीं कर पाया था। उन्होंने आगे कहाकि श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन के सामने आत्म तत्व को उद्घाटित कर दिया था। वो कहते हैं कि स्थूल शरीर के परे इंद्रियों हैं और इंद्रियों से परे मन है। मन से परे बुद्धि है। बुद्धि से परे अत्यंत श्रेष्ठ, बलवान व सूक्ष्म आत्मा है। प्रभु कहते हैं कि पार्थ तू आत्मज्ञान द्वारा अपने मनोविकार रूपी दुर्जय शत्रु को मार डाल। तेरा यह अस्थिर और चंचल मन जिस-जिस विषय और विकार के निमित पीडित होता है। साध्वी ओम भारती जी ने कहाकि इसलिए आज मनोविज्ञान को ब्रह्मज्ञान या आत्मज्ञान का आधार दीजिए जो अल्टीमेटम मनोविज्ञान है। इस अवसर पर कालेज के प्रिंसीपल राकेश बग्गा जी ने संस्थान के सभी कार्यक्रमों की सराहना की।

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