राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सरकार ने कहा- CAG रिपोर्ट में शुरुआती 3 पन्ने नहीं थे

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हो रही है।मामले की सुनवाई के दौरान एजी केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, राफेल पर कैग रिपोर्ट दाखिल करने में चूक हुई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में शुरुआती तीन पेज शामिल नहीं थे। इसपर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि आप दस्तावेज़ों के विशेषाधिकार की बात कर रहे हैं, इसके लिए आपको सही तर्क पेश करने होंगे।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को समीक्षा याचिकाओं से लीक हुए पन्नों को हटाने का निर्देश देना चाहिए। केके वेणुगोपाल ने RTI एक्ट का तर्क दिया और कहा कि सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं। इस दलील पर जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि जिन संस्थानों में ऐसा नियम है और अगर भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो जानकारी देनी ही पड़ती है।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया किजिन दस्तावेजों की बात हो रही है उसमें राफेल के दाम भी शामिल हैं जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में सेक्शन 24 का हवाला देते हुए कहा कि ये रक्षा मंत्रालय इसके अंतर्गत नहीं आता है। सरकार की इस दलील पर प्रशांत भूषण ने कहा किअगर चोरी हुई थी तो सरकार ने FIR दर्ज क्यों नहीं कराया। सरकार अपनी जरूरतों के अनुसार इन दस्तावेजों का खुलासा करती रही है।
बता दें कि इस मामले में रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा गया कि राफेल समीक्षा मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा संलग्न दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हैं, जो लड़ाकू विमान की युद्धक क्षमता से संबंधित हैं। रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि देश की संप्रभुता के साथ समझौता हुआ है। इस हलफनामे में कहा गया है कि राफेल के संवेदनशील दस्तावेजों की फोटोकॉपी की गई जिसे चोरी से ऑफिस से बाहर ले जाया गया। इसका देश की संप्रभुता और विदेशी संबंध पर विपरीत असर हुआ है। इसके पहले राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दावा किया था कि राफेल से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए अपने जवाब में उनका मतलब था कि याचिकाकर्ताओं ने ‘वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी’ का इस्तेमाल किया है।

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