पंजाब में कारगर उद्योग नीति की दरकार

अध्ययन में सामने आया-2007-2013 के बीच सूबे में 19 हजार औद्योगिक यूनिट बंद हुए

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। पिछले एक दशक के दौरान सूबे के गोबिंदगढ़ स्थित लोहा उद्योग के 150 यूनिटों को ताले लग चुके हैं और 14 हजार से अधिक कर्मचारी या श्रमिक अपनी नौकरियां गंवा चुके हैं। लोहा उद्योग की इन इकाईयों में तालाबंदी की वजह से सूबे को 95 करोड़ रुपए के सालाना राजस्व का नुक्सान होता आया है। 10 साल के भीतर यह नुक्सान एक हजार करोड़ रुपए के लगभग बैठता है। तालाबंदी की वजह से नौकरियां गंवाने वाले 14 हजार व्यक्तियों में से 44 प्रतिशत पंजाबी हैं जबकि 56 प्रतिशत वह हैं जो देश के अन्य राज्यों से थे और अब अपने घरों को लौट चुके हैं। यह आंकड़ें सेंटर फार रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डिवेल्पमैंट चंडीगढ़ द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में
सामने आए हैं। स्टेटस आफ इंडस्ट्रियल डिवेल्पमेंट इन ंपंजाब शीर्षक से सीआरआरडीआई के अर्थशास्त्री प्रो. रणजीत सिंह घुम्मन के अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट उक्त आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताती है कि ऐसा पंजाब सरकार के पास कोई पुख्ता औद्योगिक नीति न होने की वजह से हुआ है और यदि पंजाब में उद्योग को बचाना है तो अविलम्भ एक कारगर उद्योग नीति की जरूरत है। प्रो. घुम्मन की रिपोर्ट यह सिफारिश करती है कि सरकार को चाहिए कि वह मौजूदा यूनिटों को टैक्नालोजी अपग्रेड करने के लिए प्रोत्साहित करे। इसके अलावा रिपोर्ट मे यह सुझाव भी दिया गया है कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए पंजाब में उद्योगों को हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर आदि राज्यों की तरह ही सुविधाएं और रियायतें दी जानी चाहिए। पंजाब में कृषि आधारित औद्योगिक क्रांति की भी जरूरत है। रिपोर्ट में पंजाब सरकार को सलाह दी गई है कि वह पंजाब में उद्योगों की दयनीय स्थिति के जमीनी कारणों की जांच के लिए एक कमिशन गठित करे। गौरतलब है कि 2017 से 2015 तक 18770 इंडस्ट्रियल यूनिट पंजाब में बंद हुए हैं। इस समय दौरान सर्वाधिक 43 प्रतिशत इंडस्ट्रियल यूनिट अमृतसर में बंद हुए हैं। इसके बाद लुधियाना, गुरदासपुर और जालन्धर में इंडस्ट्रियल यूनिट बंद हुए हैं। उल्लेखनीय है कि जहां पंजाब में उद्योगों की तालाबंदी से उद्योगपति करोड़ों रुपए के कर्ज तले दब चुके हैं वहीं कर्ज से पीडि़त किसान भी हर रोज आत्महत्याएं कर रहे हैं।

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