दागी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट का झटका, मुकद्दमों के शीघ्र निपटारे के लिए हो सकता है फास्ट ट्रैक का गठन

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि दागी नेताओं से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो आपराधिक मुकदमों को वर्षों लटकाकर राजनीति में जमे रहने वाले नेताओं को तगड़ा झटका लगेगा। दागी नेताओं को चुनाव लडऩे से रोकने के लिए दायर की गई एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ के संकेत दिए। दागी नेताओं पर सुप्रीम ने वीरवार से सुनवाई शुरू की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दागी नेताओं के खिलाफ गंभीर मामलों का जल्द निपटारा होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहाकि अपराध में दोषी करार होने से पहले किसी उम्मीदार को चुनाव लडऩे से नहीं रोक सकता। जनप्रतिनिधि कानून में बदलाव करके भी ऐसा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों के मामलों में फास्ट ट्रैक के जरिये मामले का जल्द निपटारा करने पर विचार किया जा सकता है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध किया। केंद्र ने कहा कि इस विषय पर संसद कार्रवाई कर सकती है न कि कोर्ट। केंद्र ने कहा कि जब तक कोई आरोपी अदालत में दोषी होकर सजा नहीं पा लेता तब तक वह निर्दोष ही माना जाएगा। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि गंभीर अपराधों में अगर आरोपी पर आरोप तय हो जाए तो उसे चुनाव लडऩे से रोक देना चाहिए। इसके लिए आरोपी के दोषी साबित होने तक का इंतजार करने की जरूरत नहीं। इस मामले में गंभीर अपराध उसे माना गया है, जहां 5 साल या इससे ज्यादा सजा का प्रावधान हो।
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ इन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने कहा कि दोषी साबित होने से पहले किसी को चुनाव लडऩे से रोका नहीं जा सकता है हालांकि राजनेताओं से जुड़े गंभीर मामलों का जल्द निपटारा हो, इसकी व्यवस्था की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2016 में यह मामला पांच जजों की संविधान पीठ को विचार के लिए भेजा था। इस मामले में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय के अलावा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह और एक अन्य एनजीओ की याचिका दाखिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इस समय देश में 33 फीसद नेता ऐसे हैं जिन पर गंभीर अपराध में कोर्ट आरोप तय कर चुका है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव लडऩे से संबंधित कानून यानि जनप्रतिनिधी कानून की धारा 8 में संशोधन किया जाना चाहिए। यह धारा उम्मीदवार को चुनाव लडऩे से अयोग्य ठहराने के लिए है।
याचिका में मांग की गई है कि गंभीर अपराधों में कोर्ट में आरोप तय हो जाने पर आरोपी को चुनाव लड़ऩे से रोका जाए। इस संदर्भ में कहा गया है कि चुनाव आयोग भी 1998, 2004 और 2016 में इस मांग की सिफारिश कर चुका है। साथ ही ला कमीशन की 244वीं रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई विशेषज्ञ समितियां जिसमें गोस्वामी समिति, वोहरा समिति, कृष्णामचारी समिति, इंद्रजीत गुप्ता समिति, जस्टिस जीवनरेड्डी कमीशन, जस्टिस वेंकेटचलैया कमीशन, चुनाव आयोग और विधि आयोग भी राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जता चुके हैं लेकिन सरकार ने आज तक उनकी सिफारिशें लागू नहीं कीं।

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