अगले सत्र तक टला ट्रिपल तलाक बिल, अब सरकार ला सकती है अध्यादेश

नई दिल्ली, (मैट्रो नेटवर्क)। राफेल विमान सौदे की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग कर रहे कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार दोपहर में स्थगन के बाद भी तीन तलाक विधेयक पेश नहीं हो पाया। विपक्ष के हंगामे के कारण सरकार तीन तलाक को राज्यसभा में पेश करने में असमर्थ दिखी। मॉनसून सत्र में तीन तलाक विधेयक पेश न होने के बाद अब सरकार इसे शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। बताया जा रहा है कि सरकार तीन तलाक पर अध्यादेश लाएगी। दरअसल मोदी कैबिनेट ने जो तीन तलाक संशोधन बिल को मंजूरी दी है उसके मुताबिक यह तय किया गया है कि संशोधित बिल में दोषी को जमानत देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होगा और कोर्ट की इजाजत से समझौते का प्रावधान भी होगा। आपको बता दें कि संसद का मॉनसून सत्र आज यानि शुक्रवार को खत्म हो रहा है।
दरअसल, संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन सरकार और विपक्ष आमने-सामने थे। सरकारी की कोशिश थी कि किसी भी हाल में आज तीन तलाक बिल राज्यसभा में पास हो जाए लेकिन विपक्ष ने बिल पेश करने से पहले ही राफेल डील पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा कर दिया जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। इस बिल को राज्यसभा में पास कराने के उद्देश्य से और उस पर रणनीति बनाने के लिए ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तीन तलाक पर वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक बुलाई। इस बैठक में रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, प्रकाश जवाड़ेकर और विजय गोयल शामिल हैं। इससे पहले शुक्रवार सुबह ही अमित शाह ने भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ बैठक की थी। हालांकि अभी तय स्पष्ट नहीं हो सका है कि वरिष्ठ मंत्रियों की इस बैठक में क्या तय किया गया है।
उपसभापति हरिवंश ने सुबह के सत्र का संचालन किया और उनके आसन में बैठने पर सदस्यों ने उनका स्वागत किया। उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपील की कि वे सदन में शून्यकाल चलने दें। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि राफेल सौदा एक बड़ा घोटाला है और उन्होंने इसकी जेपीसी से जांच कराने की मांग की। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है। इस पर उपसभापति ने कहा कि सभापति ने उनके नोटिस को स्वीकार नहीं किया है।
शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी कामकाज होता है और उस अवधि में विधायी कार्य नहीं हो सकते। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में यह सहमति बनी थी कि शुक्रवार को विधायी कार्य किए जाएंगे क्योंकि द्रमुक नेता करुणानिधि के सम्मान में सदन की बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई थी। हालांकि डेरेक और आनंद शर्मा ने कहा कि बीएसी में ऐसी कोई सहमति नहीं बनी थी। गोयल ने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि तीन तलाक विधेयक को पारित किया जाए।
बाद में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि बीएसी बैठक में सुझाव दिया गया था कि शुक्रवार को विधेयकों पर चर्चा की जाएगी। सदन में हंगामे के बीच ही शून्यकाल चला। एक बार सपा के दो सदस्य आसन के समक्ष भी आ गए। सदस्यों ने शोरगुल के बीच ही लोक महत्व के विषय के तहत अपने अपने मुद्दे उठाए। हंगामे को देखते हुए उपसभापति ने 11 बजकर करीब 55 मिनट पर बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद 12 बजे बैठक फिर शुरू होने पर भी सदन में वही नजारा दिखा और सभापति नायडू ने बैठक दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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