पंजाब पुलिस में वर्चस्व की जंग और बदलते मोहरे

डीजीपी की कुर्सी के लिए चल रही खींचतान कैप्टन सरकार को पड़ सकती है महंगी

चंडीगढ़, (मैट्रो ब्यूरो)। पंजाब पुलिस में कई महीनों से चल रही वर्चस्व की जंग अब खुलकर सामने आ गई है। आए दिन इस जंग में मोहरे बदल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि डीजीपी की कुर्सी के लिए चल रही खींचतान सरकार को महंगी पड़ सकती है। पुलिस में वर्चस्व की लड़ाई कांग्रेस सरकार बनने के समय ही शुरू हो गई थी। डीजीपी सुरेश अरोड़ा सेंट्रल डेपुटेशन की तैयारी कर चुके थे पर सरकार द्वारा उन्हें रोकते ही इस पद के कुछ दावेदारों को झटका लगा। जिनमें डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय भी थे। इसके बाद एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू को एसटीएफ की कमान सौंप कर सबसे ज्यादा पावरफुल बना दिया गया। तब डीजीपी की कुर्सी के समानान्तर एक और लड़ाई शुरू हो गई। सिद्धू को बार्डर रेंज का भी चार्ज दे दिया गया। इसके बाद डीजीपी सुरेश अरोड़ा का कद काफी कम हो गया। इसी दौरान एसटीएफ ने इंस्पैक्टर इंदरजीत सिंह को पकड़ा, काफी रिकवरी हुई। तहकीकात हुई तो जांच की आंच एसएसपी राजजीत सिंह तक पहुंच गई। डीजीपी सुरेश अरोड़ा अंदरखाते राजजीत के पक्ष में आ गए। राजजीत के सियासी संपर्कों के चलते सरकार ने भी एसटीएफ को रोक दिया। पर एसटीएफ ने सबूत इकट्ठे किए और एसएसपी राजजीत को अचानक पता चला कि वह एसटीएफ द्वारा दायर चालान में फंस रहे हैं तो उन्होंने सरकार को लिखा कि एडीजीपी सिद्धू उन्हें झूठे केस में फंसा रहे हैं। सरकार के दखल न देने के बाद राजजीत ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अगुवाई में तीन मेंबरी एसआईटी बना कर जांच के आदेश दिए। इस दौरान सरकार ने हरप्रीत सिद्धू का कद घटाकर सुरेश अरोड़ा को मजबूत किया। सिद्धु को अरोड़ा को रिपोर्ट करने के आदेश दिए। अब लड़ाई फिर डीजीपी की कुर्सी के इर्द-गिर्द सिमट गई है। सुरेश अरोड़ा सितंबर 2018 में रिटायर हो रहे हैं। दिनकर गुप्ता अब डीजीपी की कुर्सी के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। सुरेश अरोड़ा भी उनके साथ है लेकिन गुप्ता को लग रहा है कि डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय उन्हें गलत ढंग से फंसाकर उनकी दावेदारी को मुश्किल में डाल सकते हैं। जबकि डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने कहा कि डीजीपी सुरेश अरोड़ा व दिनकर गुप्ता चड्डा सुसाइड केस में उन्हें गलत ढंग से फंसा सकते हैं।

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