हमें अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए : उर्मिला भारती

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल के स्थानीय विधिपुर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग के दौरान संस्थान की प्रवक्ता तथा संस्थान के संस्थापक श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी उर्मिला भारती ने कहा कि वैदिक काल में दीक्षांत समारोह के समय युवाओं को अपने माता-पिता के आदर के संदर्भ में शिक्षा दी जाती थी। इसका वर्णन उपनिषदों में मिलता है। मातृदेवो भव, पितृदेवो भव- अपनी माता को देवी अथवा पिता को देव समान पूज्य मानो। चाणक्य नीति में कहा गया- वृद्धसेवया विज्ञानात्- अर्थात् वृद्ध सेवा से सत्य ज्ञान प्राप्त होता है। विदुर नीति के 5वें अध्याय में आता है-जो अपने बड़े बुजुर्गों का सम्मान करता है, उनकी आज्ञाओं का पालन करता है ऐसे व्यक्ति को निश्चित ही स्वर्ग मिलता है। इसके विपरीत आचरण करने वालों को घोर नरक की यातना सहन करनी पड़ती है।

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