एलपीयू में रंगमंच महोत्सव के तीसरे दिन मानवता की कमजोरी

जालन्धर, 27 अगस्त (मैट्रो सेवा)। एलपीयू के शांतिदेवी मित्तल ऑडिटोरियम में खचाखच बैठे दर्शकों के सामने  ‘अभिनय रंगमंच’ हिसार ने हिन्दी नाट्क ‘पतलून’ का प्रायोजन किया। इसके लेखक एवं निर्देशक मशहूर कलाकार मनीष जोशी बिसमिल ने नाटक द्वारा इन्सान की अधूरी इच्छाओं और उसके संघर्ष को दर्शाया कि किस तरह अपनी असामान्य इच्छाओं को पूरा करने के लिए इन्सान कितना जूझता रहता है। अत्य्धिक संवेदनशील चित्रण करते हुए इस नाटक में एक मोची की दर्द भरी भावनाओं को दिखाया गया।  एलपीयू में हो रहे थिएटर फैस्ट को बोहिमियन थिएटर ग्रुप का भी समर्थन रहा है।  इस नाटक में ‘भगवान’ नामक नायक के बारे में बताया गया। भगवान किसी समय में बंधुआ मजदूर हुआ करता था लेकिन अपने-आपको बचाते हुए वह शहर की भीड़-भाड़ वाली दुनिया में पहुंच गया।  वहां पर उसने जूते साफ करने का काम शुरू किया। जूते चमकाते हुए वह अकसर लोगों की पतलून पर पॉलिश लगा देता था। इस पर लोग उसको डांटते और धिक्कारते थे। उन्होंने भगवान को कहा कि तुम क्या जानो कि यह पैंट व्यक्ति का स्टेटस सिंबल होता है और इसको पहनने पर आत्म-विश्वास बढ़ता है। यह सुनकर भगवान ने भी यह प्रण किया कि वह भी एक दिन पैंट जरूर खरीदेगा। जब उसे पता लगा कि एक जोड़ी पतलून की कीमत 1500 रुपए है तो उसने पैसे जमा करने शुरू कर दिए। वो 500 रुपए बचाने में सफल भी हो गया था परंतु बदकिस्मती से किसी जादूगर ने चाल चलते हुए उसके सारे पैसे लूट लिए। फिर भी भरोसा न छोड़ते हुए भगवान ने यह ठान लिया कि वो और मेहनत करेगा और अवश्य ही एक जोड़ी नई पतलून अपने लिए जरूर खरीदेगा। बढ़ी ही जद्दोजहिद एवं भरपूर कोशिशों के बाद भगवान पैंट खरीदने में सफल हो ही गया। परंतु  बदकिस्मती से वह पैंट को डाल न सका क्योंकि वह लेडी•ा पैंट खरीद कर ले आया था। वह यह पैंट टेलर को देकर भी गया लेकिन किसी डरावने सपने के बाद वो उसको वापिस लेकर आ गया। नाटक के आखिरी सील फलफन में जब भगवान की मृत्यु होने वाली थी तो उसकी पैंट पहनने की इच्छा लगभग पूरी हो रही थी।  परंतु भगवान का अभागय देखिए कि जब उसकी पैंट डालने की हसरत पूरी हुई तो वह पैंट उसे फिट ना आ सकी और अपनी इच्छा पूरी ना होते हुए उसकी मृत्यु हो गई। सुसज्जित स्टेज तथा  नाटक में दिखाए गए जादू ने दर्शकों का मन मोह लिया। सभी लोगों ने इस नाटक की तारीफ की तथा कलाकारों की परर्फोमेन्स देख कर काफी प्रभावित हुए।

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