हम अंत समय में जिस चीज का ध्यान करेंगे, अगले जन्म उसी योनि को प्राप्त करेंगे : साध्वी सुश्री भाग्यश्री भारती

जालन्धर, (मैट्रो ब्यूरो)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान व श्री राधा कृष्ण भागवत परिवार द्वारा मस्त राम पार्क, माई हीरां गेट में आयोजित में सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया गया, जिसके अंतिम दिन दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से परम पूजनीय सर्वश्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री भाग्यश्री भारती ने सुदामा प्रसंग और रूकमनी विवाह का वर्णन करते हुए आत्मा और परमात्मा के गूढ रहस्य को बयान किया। जिस शाश्वत संबंध को जोडऩे के लिए इंसान मानव तन लेकर इस धरती पर आता है। साध्वी ने बताया कि ईश्वर की कृपा से प्राप्त मनुष्य जन्म का लाभ यही है कि हम ज्ञान और भक्ति से अपने जीवन को ऐसा बना ले कि जीवन के अंतिम समय में भी प्रभु का स्मरण बना रहे, प्रभु की ही याद रहे। क्योंकि हम अंत समय में जिस चीज का भी ध्यान करेंगें हम अगले जन्म में उसी योनि को ही प्राप्त होंगें। भगवान श्री कृष्ण ने श्री मद्भगवद्गीता के 8वें अध्याय में कुछ और भी कहा है-
यं यं वापि स्मरंभावं त्यजत्यनते कलेवरम्।
तं तमेवैति कौन्तेय सदा तदभावभावित:।।
कि अंत काल में जो मेरा स्मरण करता हुआ अपनी देह का त्याग करता है वह मुझे ही प्राप्त होता है। भाव अगर अंत समय में उस ईश्वर को ही याद किया तो उसे पाने का सौभाग्य प्राप्त होगा और यही मानव जीवन का उद्देश्य भी है कि हम जिस ईश्वर के अंश है उसे जाने भी। कथा प्रसंग में साध्वी जी ने द्रोपदी की व्यथा पर प्रकाश डाला और उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इंसान आज अपनी भारतीय संस्कृति से पिछड़ चुका है और पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर बड़ा गौरव महसूस करता है। कथा के दौरान साध्वी सुश्री भगवती भारती, सोनिया भारती, स्वामी कुलवीरा भारती ने मधुर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। रजनी बाहरी (कोंसलर), अश्विनी भंडारी एकस कौंसलर, श्री ललित चड्ढा और श्रीराधा कृष्ण भागवत परिवार के सदस्यों के साथ स्वामी सदानंद जी सज्जनानंद जी ने दीप प्रजवलन की रस्म को अदा किया।

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